वाराणसी / लखनऊ : यूपी सरकार के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। वाराणसी की एमपी/एमएलए कोर्ट ने रामचरितमानस पर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। बीजेपी नेता अशोक कुमार द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि मौर्य ने सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। अदालत ने कैंट थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
जानें क्या था विवादित बयान
22 जनवरी 2023 को एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में मौर्य ने कहा था कि “रामचरितमानस तुलसीदास ने अपनी खुशी के लिए लिखा। इसमें दलितों और महिलाओं का अपमान है।” उन्होंने इसे या तो बैन करने या आपत्तिजनक अंश हटाने की मांग की थी।
देशभर में विरोध और केस
बयान के बाद मौर्य के खिलाफ देशभर में विरोध शुरू हुआ। कई शहरों में एफआईआर, पुतला दहन, स्याही फेंकने की घटनाएं हुईं। लखनऊ, गोरखपुर, झांसी, प्रयागराज, और अन्य शहरों में उनके खिलाफ धारा 153-A, 295-A, 504 जैसी धाराओं में केस दर्ज हुए।
कोर्ट का कड़ा रुख
वाराणसी कोर्ट ने यह आदेश सुनवाई के दौरान वीडियो सबूतों के आधार पर दिया। अब पुलिस वीडियो फुटेज और बयानों की जांच कर आगे की कार्रवाई करेगी। यह मामला धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की गंभीर श्रेणी में आता है।
सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित याचिका
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इन केसों को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब भी जारी है।
