पीलीभीत : पीलीभीत जिले में प्रस्तावित शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। एक्सप्रेसवे का निर्माण जिले की बीसलपुर और सदर तहसील के 48 गांवों से होकर किया जाना है। गजट अधिसूचना जारी होने के बाद अब प्रशासन और संबंधित विभागों की संयुक्त टीमों ने जमीनी स्तर पर सर्वे कार्य शुरू कर दिया है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), कंसल्टेंसी एजेंसी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव पहुंचकर सर्वे कर रही है। इस सर्वे के दौरान यह चिन्हित किया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में किन किसानों की कितनी भूमि आ रही है, जमीन पर वर्तमान में खेती हो रही है या किसी प्रकार का निर्माण मौजूद है।
अधिकारियों को दो माह के भीतर सर्वे कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि सर्वे शुरू हुए करीब 15 दिन हो चुके हैं और टीम लगातार गांवों में पहुंचकर आवश्यक जानकारियां एकत्र कर रही है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। जिन गांवों से यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा, वहां रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और जमीनों की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, परिवहन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में 3-ए की कार्रवाई के तहत राजस्व विभाग ने संबंधित गाटा संख्याओं का विवरण तैयार किया था। इसके बाद एलाइनमेंट तय होने पर प्रभावित गांवों की गजट अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना जारी होते ही एक्सप्रेसवे में शामिल गांवों की जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में जिलाधिकारी पहले ही बीसलपुर और सदर के उप निबंधकों को निर्देश जारी कर चुके हैं कि अधिसूचित गांवों की भूमि के किसी भी प्रकार के बैनामे पंजीकृत न किए जाएं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और विवादमुक्त बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
फिलहाल प्रभावित गांवों के किसान सर्वे कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में सर्वे पूरा होने के बाद मुआवजा निर्धारण और भूमि अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, एक्सप्रेसवे परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
