बरेली : पाक और बरकतों भरे महीने रमज़ान के तीसरे जुमे के मौके पर बरेली समेत देश की मस्जिदें और दरगाहें नमाज़ियों से गुलज़ार नजर आईं। शहर की प्रमुख मस्जिदों में जुमे की नमाज़ अकीदत और खशू-खुज़ू के साथ अदा की गई। यहां बड़ी तादाद में रोज़ेदार और नमाज़ी इबादत के लिए पहुंचे। उलमा-ए-इकराम ने रमज़ान की फज़ीलत, रोज़े की अहमियत और ज़कात व सदक़ा की अदायगी पर रोशनी डालते हुए समाज में जरूरतमंदों की मदद करने का पैगाम दिया। शहर के किला स्थित शाही जामा मस्जिद में दोपहर करीब 1:30 बजे शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम की इमामत में जुमे की मुख्य नमाज़ अदा की गई। नमाज़ से पहले दिए गए ख़ुत्बे में रमज़ान की बरकतों और इबादत की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की गई। नमाज़ के बाद मुल्क की सलामती, खुशहाली और इंसानियत की बेहतरी के लिए दुआ की गई। रज़ा मस्जिद में दोपहर 3 बजे जुमे की नमाज़ अदा हुईं।नमाज़ से पहले मुफ्ती जईम रज़ा ने ख़ुत्बा पेश किया, जिसके बाद खास दुआ कराई गई।
शरई मालदार मुसलमानों पर ज़कात फ़र्ज़
नमाज़-ए-जुमा के बाद उलमा ने कहा कि इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में ज़कात की अहम इबादत शामिल है। उन्होंने कहा कि शरई मालदार मुसलमानों पर ज़कात अदा करना फ़र्ज़ है और रमज़ान का महीना ज़कात और सदक़ा देने का सबसे अफ़ज़ल वक्त माना जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ज़कात और सदक़ा-ए-फितर की रकम समय रहते अदा करें, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में बराबर शामिल हो सकें। शहर के पुराना शहर, किला, जखीरा, जसौली, बाकरगंज, हुसैनबाग और आज़म नगर समेत कई इलाकों की मस्जिदों में भी जुमे की नमाज़ के लिए नमाज़ियों की बड़ी भीड़ देखने को मिली। मस्जिदों के बाहर भी नमाज़ियों की कतारें नजर आईं।
दरगाहों में अमन-ओ-चैन के लिए मांगी गई दुआ
रमज़ान के तीसरे जुमे पर दरगाह ताजुश्शरिया, खानकाह -ए- नियाज़िया, दरगाह नासिरी और शहर की अन्य प्रमुख दरगाहों में भी अकीदतमंदों ने इबादत कर देश और दुनिया में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। उलमा ने इस मुकद्दस महीने में रोज़ा, नमाज़, कुरआन की तिलावत और ज़रूरतमंदों की मदद की अहमियत पर जोर दिया।
महिला रोज़ेदारों ने दरगाह पर मांगी खास दुआएं
रमज़ान के तीसरे जुमे के मौके पर दरगाह नासिर मियां पर महिला रोज़ेदारों ने हाज़िरी देकर गुलपोशी की और खास दुआएं मांगीं। पम्मी खां वारसी ने बताया कि अकीदतमंदों ने दुआ में हज़रत नासिर मियां जैसे बुजुर्ग वली को वसीला बनाकर अल्लाह से दुनिया में अमन-ओ-चैन कायम रहने की दुआ की गई है। उन्होंने दुआ करते हुए कहा कि दुनिया में जहां-जहां जंग और हिंसा हो रही है, वहां अमन कायम हो, मज़लूमों को राहत मिले और जालिमों के नापाक इरादे नाकाम हों। उन्होंने कहा कि जंग कभी किसी मसले का हल नहीं होती, बल्कि इससे केवल बेगुनाह लोगों का खून बहता है और इंसानियत को नुकसान होता है।
