नई दिल्ली : पश्चिमी एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर शांति और संवाद की वकालत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा हालात को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी संकट का स्थायी समाधान सैन्य टकराव नहीं, बल्कि कूटनीति और संवाद के जरिए ही संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से शांति, स्थिरता और आपसी बातचीत का समर्थक रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पश्चिमी एशिया में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष न सिर्फ क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाएगा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सभी देशों को जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की जरूरत है।
भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिमी एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाएगी। पीएम ने भरोसा दिलाया कि भारत संबंधित देशों के साथ संपर्क में है और संकट की घड़ी में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत न केवल अपने नागरिकों की रक्षा करेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति बहाली के लिए रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाने को भी तैयार है। भारत का मानना है कि बातचीत और आपसी विश्वास से ही स्थायी समाधान निकल सकता है।
कनाडा के साथ यूरेनियम और परमाणु सहयोग
इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता की जानकारी भी साझा की। पीएम मोदी ने बताया कि भारत और कनाडा के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। खासतौर पर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors) के विकास और उपयोग पर मिलकर काम करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सहयोग भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
पश्चिमी एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित लाने की तैयारी
वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी पश्चिमी एशिया में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस संबंध में विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और दूतावासों के साथ लगातार संपर्क में रहा जा रहा है। प्रल्हाद जोशी ने कहा कि संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा सरकार की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले यूक्रेन संकट के दौरान भी भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया था। जहां भी भारतीय संकट में होते हैं, सरकार उन्हें अकेला नहीं छोड़ती।
उन्होंने चिंतित परिवारों को आश्वासन देते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार सभी संभावित विकल्पों पर काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल हवाई यात्रा जोखिमपूर्ण हो सकती है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कुल मिलाकर, पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शांति, संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। साथ ही, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
