नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह नारा सिर्फ अंग्रेजों को करारा जवाब नहीं था, बल्कि आज भी यह देशवासियों को प्रेरणा देता है। पीएम ने यह भी बताया कि महात्मा गांधी के समय भी यह गीत अत्यंत प्रिय था और उनके लिए यह राष्ट्रीय भावना का प्रतीक था।
पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् के साथ पिछली सदी में अन्याय हुआ और इसे लेकर विश्वासघात भी किया गया। उन्होंने 15 अक्टूबर 1936 की घटना का जिक्र किया, जब मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया। कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को यह अपने सिंहासन को हिलाता दिखा और उन्होंने मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों की निंदा करने की बजाय वंदे मातरम् की पड़ताल शुरू कर दी। पीएम ने सवाल उठाया कि कौन सी ताकत थी जिसने बापू जैसी भावनाओं को भी पीछे छोड़ दिया।
उन्होंने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 7 नवंबर 1875 को लिखा गया वंदे मातरम् गीत और उपन्यास आनंदमठ में इसके प्रकाशन का इतिहास साझा किया। 1882 में यह पहली बार बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित हुआ। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे गाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार प्रस्तुत किया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण कांग्रेस ने वंदे मातरम् को टुकड़ों में बांटा और मुस्लिम लीग के सामने झुक गई। उन्होंने 1947 में आजादी के बाद भी देश की चुनौतियों और प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर संकट में देश ने वंदे मातरम् की भावना के साथ कदम बढ़ाया। आज भी 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर यह भावना हर जगह दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री ने देशभक्तों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि खुदीराम बोस, रोशन सिंह, राजेंद्र नाथ लहरी, रामकृष्ण विश्वाश और मास्टर सुरसेन जैसे युवाओं ने वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ अपने प्राणों की आहुति दी। मास्टर सुरसेन ने 1934 में फांसी के समय अपने साथियों को पत्र लिखते हुए केवल एक शब्द लिखा,“वंदे मातरम्।” उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के लोग इस गीत को अपनाकर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का मंत्र पेश कर रहे थे।
पीएम ने वंदे मातरम् के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति और एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी सांसदों और नागरिकों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति संवेदनशील रहें और इसे हर अवसर पर याद करें।
