पीलीभीत : पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय जीएसटी घोटाले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह फर्जी फर्में बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। हर साल सौ से अधिक फर्जी फर्मों का निर्माण कर जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा रही थी। करीब नौ महीने पुराने मामले की जांच के बाद पुलिस ने दिल्ली से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मामले की जानकारी देते हुए एएसपी नताशा गोयल ने बताया कि इस फर्जीवाड़े को लेकर माधोटांडा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच और पुलिस टीम ने जांच शुरू की। जांच के दौरान धीरे-धीरे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। पुलिस को पता चला कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित गिरोह है, जो फर्जी फर्मों के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड चंदन मिश्रा पहले से जेल में बंद है, जबकि पुलिस ने दबिश देकर चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विपिन जैन, दीपक, बच्चन और हरिओम के रूप में हुई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया पर नौकरी और सस्ते लोन दिलाने के नाम पर विज्ञापन चलाते थे। बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को कमीशन और अतिरिक्त कमाई का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते और अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल कर लिए जाते थे। इसके बाद आरोपियों द्वारा फर्जी रेंट एग्रीमेंट और अन्य नकली दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पोर्टल पर आवेदन कर एआरएन यानी एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर जनरेट कराया जाता था। पीड़ितों को इस बात की भनक तक नहीं लगती थी कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। उनके मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी भी आरोपी किसी न किसी तरीके से हासिल कर लेते थे।

पुलिस के अनुसार एक बार एआरएन नंबर जनरेट होने के बाद इस गिरोह के तार दिल्ली तक जुड़ जाते थे। जांच में सामने आया कि कुछ लोगों की मदद से फर्जी जीएसटी नंबर पास कराए जाते थे। इसके बाद सक्रिय किए गए जीएसटी नंबरों को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था। व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह पूरा कारोबार संचालित किया जा रहा था। इन फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया जाता था, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि होती थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन, 9 सिम कार्ड और 15 जीमेल आईडी से जुड़ी जानकारी और पासवर्ड बरामद किए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन डिजिटल उपकरणों से इस पूरे नेटवर्क के कई और राज सामने आ सकते हैं। पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने में किसी भी प्रकार की मदद की। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी के इस मामले ने एक बार फिर संगठित आर्थिक अपराध के बड़े नेटवर्क की पोल खोल दी है। फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई लगातार जारी है।
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
