नई दिल्ली : तालकटोरा स्टेडियम से एक बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को जाति जनगणना पर चुप्पी तोड़ दी। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस शासनकाल में जातिगत जनगणना न करवाना उनकी ‘व्यक्तिगत भूल’ थी, और अब वह इसे ठीक करेंगे। नेता विपक्ष ने ‘ओबीसी नेतृत्व भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में मंच से कहा, “अगर मुझे आपकी (OBC वर्ग की) समस्याओं का थोड़ा भी अंदाज़ा होता, तो मैं उसी समय जाति जनगणना करवा देता। ये गलती कांग्रेस की नहीं, मेरी है। मैं इसे सुधारूंगा।”राहुल ने बताया कि उन्हें 10–15 साल पहले दलित और आदिवासी मुद्दे तो समझ में आए, लेकिन ओबीसी की समस्याएं “छुपी हुई” थीं। “अब समझ आ गया है कि 90 फीसद आबादी जो देश का हलवा बनाती है, उसे ही उसका स्वाद नहीं मिलता। सिर्फ 10% लोग खा रहे हैं।”
राहुल गांधी का फोकस अब स्पष्ट
उन्होंने कहा कि जाति जनगणना जरूरी है। बजट और सत्ता में 90 फीसद बहुसंख्यकों की भागीदारी तय करना है। OBC -दलित -आदिवासी -अल्पसंख्यक वर्ग को ‘सम्मान और प्रतिनिधित्व’ दिलाना।
मल्लिकार्जुन खरगे ने भी किया हमला
कांग्रेस चीफ खरगे ने कहा, कि “एसआईआर सिर्फ बिहार नहीं, अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है। ये ओबीसी, एससी/एसटी और महिलाओं से वोट का अधिकार छीनने की साजिश है।”उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस अब ‘वोटर लिस्ट’ से गरीबों को ही काट देना चाहती है। उन्होंने बाबा साहेब और नेहरू का नाम लेकर मौजूदा सत्ता पर करारा प्रहार किया।
