नई दिल्ली : भारतीय रुपया लगातार दबाव में नजर आ रहा है। शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है।
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में रुपया 28 पैसे गिरकर 94.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा दिन है जब रुपये में गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले बुधवार को रुपया 94.05 पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को यह 93.76 के स्तर पर था। लगातार हो रही इस गिरावट ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
अगर बाजार के ट्रेंड पर नजर डालें तो बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.94 पर खुला और दिनभर के कारोबार के दौरान 93.86 से 94.08 के बीच उतार-चढ़ाव के बाद अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट यह संकेत देती है कि रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है और फिलहाल राहत के आसार कम नजर आ रहे हैं। अब बात करते हैं इस गिरावट के पीछे की बड़ी वजहों की सबसे प्रमुख कारण है विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकालना। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पूंजी निकालते हैं, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की कीमत कमजोर हो जाती है।
इसके अलावा, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भी रुपये पर भारी पड़ रहा है। खासकर ईरान में जारी संकट और पूरे क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक बना दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्रा, जैसे रुपया, दबाव में आ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ और विदेशी निवेश की निकासी जारी रही, तो रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है। फिलहाल, बाजार की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेश के रुख पर बनी हुई है, जो यह तय करेगा कि रुपया आगे संभलेगा या और कमजोर होगा।
