नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी अदालत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ने का आदेश दिया है। अब इन सभी मामलों की सुनवाई तीन जजों की विशेष बेंच करेगी, जिससे पूरे मामले में एक स्पष्ट और एकरूप फैसला सामने आ सके।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें गैंगस्टर एक्ट की कुछ धाराओं को संविधान के खिलाफ बताया गया है। इन याचिकाओं में यह दलील दी गई है कि कानून के कुछ प्रावधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं और इन्हें न्यायिक जांच की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि अलग-अलग अदालतों या बेंचों में एक जैसे मामलों की सुनवाई से भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़कर एक ही बेंच के सामने सुना जाए, ताकि एक समान और ठोस निर्णय दिया जा सके।
कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि अब केंद्र सरकार भी इस कानून का पक्ष रखेगी और बताएगी कि यह कानून क्यों जरूरी है और इसकी संवैधानिकता किस आधार पर टिकती है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट वर्ष 1986 में लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में संगठित अपराध, डकैती और आपराधिक गिरोहों पर लगाम लगाना है। इस कानून के तहत अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, संपत्ति जब्ती और गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने जैसी शक्तियां प्रशासन को दी गई हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों की अलग-अलग बेंच में सुनवाई से कानूनी असमंजस पैदा होता है। उन्होंने यह भी दलील दी कि पहले कुछ याचिकाएं खारिज हुई थीं, लेकिन उन्हें अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि उन पर विस्तार से सुनवाई नहीं हुई थी।
इस दौरान “बेंच हंटिंग” यानी मनचाही बेंच चुनने का मुद्दा भी उठा। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने इस आरोप से साफ इनकार किया और कहा कि उनका मकसद केवल न्यायिक स्पष्टता है, न कि किसी विशेष बेंच से फैसला करवाना। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी संगठित अपराध से निपटने के लिए इसी तरह के सख्त कानून बनाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में भी ऐसे कानून लागू हैं, जिनका मकसद आपराधिक नेटवर्क पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करना है। अब इस मामले की सुनवाई तीन जजों की विशेष बेंच करेगी। हालांकि, जिन मामलों की सुनवाई पहले से आंशिक रूप से हो चुकी है, उन्हें ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।
