OPU-IVF तकनीक से सात माह बाद मिली कामयाबी, स्वदेशी नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
बरेली : शहर के इज्जतनगर थाना स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के वैज्ञानिकों ने पशुधन क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने टेस्ट ट्यूब भ्रूण प्रत्यारोपण (OPU-IVF तकनीक)के जरिए चार स्वस्थ बछड़ों और एक बछिया का सफल जन्म कराया है।यह उपलब्धि करीब सात महीने की मेहनत के बाद हासिल हुई।
जानें कैसे मिली सफलता
यह सफलता पशु प्रजनन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार के नेतृत्व में हासिल हुई। इस शोध में डॉ. विक्रांत सिंह चौहान, डॉ. विकास चंद्र, डॉ. एमके पात्रा समेत कई वैज्ञानिकों का अहम योगदान रहा।वैज्ञानिकों ने ओवम पिकअप (OPU), इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), एंब्रियो ट्रांसफर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर भ्रूण तैयार किया और उसे सेरोगेट मदर में प्रत्यारोपित किया।
स्वदेशी नस्लों पर फोकस

इस प्रक्रिया में साहीवाल, थारपारकर और मुर्रा भैंस जैसी स्वदेशी उत्कृष्ट नस्लों का इस्तेमाल किया गया।पहला बछड़ा 28 फरवरी 2026 को साहीवाल गाय “गौरी” से जन्मा, जबकि मार्च में अन्य बछड़े और बछिया का जन्म हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार, उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले जर्मप्लाज्म के कारण इन पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता भी बेहतर होगी।
किसानों के लिए कैसे फायदेमंद
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सामान्य प्रक्रिया में जहां एक गाय/भैंस साल में एक ही बार गर्भधारण करती है, तो वहीं OPU-IVF तकनीक से एक गाय से साल में करीब 20 तक और भैंस से 10 तक उन्नत नस्ल के पशु तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसानों को बेहतर नस्ल, ज्यादा दूध उत्पादन अधिक आय मिलेगी।
पहले भी मिल चुकी है सफलता
आईवीआरआई ने वर्ष 2018 में एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक से स्वदेशी गोवंश प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया था, जिसमें 4 साल में 30 बछड़ों का जन्म हुआ। वहीं 2022-23 में OPU-IVF तकनीक अपनाने के बाद यह प्रक्रिया और ज्यादा प्रभावी साबित हुई। इस उपलब्धि पर डॉ. राघवेंद्र भट्टा, डॉ. एमएल जाट ने वैज्ञानिकों की टीम की सराहना की और इसे पशुधन विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
