बेनामी धन खपाने का बड़ा जरिया बना था हवाला नेटवर्क, 35 लाख के साथ दो दबोचे गए
बरेली : शहर की थाना बारादरी पुलिस ने हवाला कारोबार के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।पुलिस ने उनके कब्जे से 35 लाख रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में इस पूरे नेटवर्क के तार दुबई से जुड़े होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अन्य एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है।
मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई, माधोबाड़ी से दो दबोचे

दरअसल, एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर जिलेभर में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।इसी दौरान बारादरी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग हवाला के जरिए बड़े पैमाने पर पैसों का अवैध लेन-देन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने माधोबाड़ी क्षेत्र में छापेमारी की और मौके से हजियापुर चुंगी निवासी जमीर अहमद तथा राजस्थान के बीकानेर निवासी जगदीश चोटिया को गिरफ्तार कर लिया, जब दोनों की तलाशी ली गई, तो उनके पास से 35 लाख रुपये नकद,चार मोबाइल फोन और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए। इतनी बड़ी नकदी और फर्जी दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस को अंदेशा हो गया था कि मामला केवल अवैध लेन -देन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। इसी शक के आधार पर दोनों आरोपियों से विस्तार से पूछताछ शुरू की गई।
दुबई से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क
पूछताछ के दौरान जमीर अहमद ने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि उसका संपर्क दुबई में रहने वाले अली जीशान नाम के व्यक्ति से था, और उसी के निर्देश पर मोईन अली के नाम से KGN कंपनी बनाई गई थी। यह कंपनी पीलीभीत बाईपास रोड स्थित आशुतोष सिटी में संचालित दिखाई जाती थी, लेकिन वास्तविकता में वहां कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं होती थी। पुलिस के अनुसार कंपनी का इस्तेमाल केवल हवाला कारोबार को संचालित करने के लिए किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि दुबई में बैठा अली जीशान व्हाट्सएप के माध्यम से टोकन नंबर भेजता था। इसके बाद अलग-अलग खातों में बड़ी रकम जमा कराई जाती थी और फिर उसी टोकन नंबर के आधार पर यह पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली में मौजूद लोगों तक पहुंचाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया था कि पैसे भेजने और प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान गोपनीय बनी रहे, और किसी भी एजेंसी के लिए लेन-देन की वास्तविक कड़ी तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
चार साल से चल रहा था खेल
इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी जगदीश चोटिया ने भी पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उसने स्वीकार किया कि वह पिछले चार वर्षों से बरेली में हवाला कारोबार से जुड़ा हुआ था और कई लोग टैक्स बचाने या बेनामी धन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए उसकी सेवाएं लेते थे। उसने बताया कि वह कमीशन के बदले टोकन नंबर के आधार पर धनराशि संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने का काम करता था। इस दौरान ग्राहकों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती थी और नेटवर्क से जुड़े लोग केवल तय कोड और टोकन नंबर के जरिए एक-दूसरे से संपर्क करते थे। यही वजह थी कि इतने लंबे समय तक यह नेटवर्क बिना किसी बड़े खुलासे के संचालित होता रहा।
तीन आरोपी फरार,फंडिंग के स्रोतों की पड़ताल
पुलिस जांच में अब तक यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में केवल गिरफ्तार किए गए दो आरोपी ही शामिल नहीं थे, बल्कि मोईन अली, लालचंद और धम्माराम नाम के तीन अन्य लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी।पुलिस ने तीनों को वांछित घोषित कर दिया है, लेकिन फिलहाल वे फरार हैं, और उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। इस मामले में थाना बारादरी में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है, ताकि उनसे और पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें। वहीं जांच एजेंसियां यह पता लगाने में भी जुटी हैं कि हवाला के जरिए भेजा जा रहा यह पैसा आखिर किन लोगों का था और इसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जाना था। फिलहाल बारादरी पुलिस की इस कार्रवाई को हवाला कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
