नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बना है। उनका “राजा नहीं हूं, राजा बनना भी नहीं चाहता हूं” वाला बयान, जो उन्होंने विज्ञान भवन में आयोजित वार्षिक कानूनी सम्मेलन (Annual Legal Conference 2025) के दौरान दिया। जब राहुल गांधी मंच पर संबोधन देने पहुंचे, तभी दर्शक दीर्घा से नारेबाजी शुरू हो गई, “देश का राजा कैसा हो, राहुल गांधी जैसा हो!”
राहुल गांधी ने समर्थकों को मुस्करा कर दिया जवाब
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए समर्थकों को शांत किया और बोले “नहीं बॉस, मैं राजा नहीं हूं। राजा बनना भी नहीं चाहता। मैं ‘राजा’ की अवधारणा के ही खिलाफ हूं।”यह बात सुनते ही हॉल में ज़ोरदार तालियां गूंजने लगीं। राहुल गांधी कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राजा’ की उपाधि देकर उन पर जनता की आवाज न सुनने का आरोप लगाते रहे हैं। इस बार उन्होंने यह बात अपनी पार्टी के समर्थकों को ही सार्वजनिक रूप से कही। राहुल का यह बयान न सिर्फ उनके जनतांत्रिक मूल्यों की झलक दिखाता है, बल्कि उनकी राजनीतिक रणनीति में जनसरोकारों को प्राथमिकता देने की सोच को भी जाहिर करता है।
कानूनी सम्मेलन तालियों से गूंजा
राहुल गांधी जब विज्ञान भवन में 2025 के कानूनी सम्मेलन में शामिल हुए, तो उन्होंने देश की न्याय व्यवस्था, संविधान और जनसंवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा”देश को राजा नहीं चाहिए, देश को जनता के सेवक चाहिए। नेता वह है, जो सबसे पहले सुने।”यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी को लेकर 2029 के लोकसभा चुनावों में बड़ी भूमिका की अटकलें तेज़ हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। कुछ यूज़र्स ने राहुल की विनम्रता की सराहना की, तो कुछ ने इसे “पॉलिटिकल स्टंट” कहा। ट्विटर पर #राजा_नहीं_हूं ट्रेंड कर रहा है।
