नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 0.60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 112.90 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया। हालांकि कीमतों में यह गिरावट मामूली है, लेकिन इसके पीछे की वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव है, जो आने वाले समय में बाजार को और प्रभावित कर सकता है।
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि वह दो दिन के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोले। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमले किए जा सकते हैं। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
अमेरिका के इस रुख के जवाब में ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उसके किसी भी ठिकाने पर हमला किया गया तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने की आशंका ने ऊर्जा बाजार में घबराहट पैदा कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा दी है। हजारों अतिरिक्त मरीन और नौसैनिकों की तैनाती की जा रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इस बढ़ती सैन्य गतिविधि का असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। निवेशक सतर्क हो गए हैं और जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी बीच, वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है। बैंक का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होती है, तो यह वैश्विक क्रूड बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक साबित हो सकता है। नए अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जो पहले के 77 डॉलर के अनुमान से करीब 10 प्रतिशत अधिक है। वहीं, WTI की कीमत का अनुमान भी बढ़ाकर 79 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर तेल की कीमतों का रुख काफी हद तक निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है, तो बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।