लाठीचार्ज विवाद पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं का गुस्सा, ओपी राजभर को छात्रों ने कहा ‘दलबदलू’
बाराबंकी/लखनऊ : यूपी के बाराबंकी स्थित श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में हाल ही में छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसमें कई ABVP कार्यकर्ता घायल हो गए। घटना के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक घायलों से मिलने अस्पताल भी पहुंचे। मगर, इस बीच, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बयान दिया कि “अगर आप गुंडागर्दी करेंगे, तो पुलिस कार्रवाई करेगी। अगर प्यार से मानेंगे तो पुलिस प्यार से समझाएगी, लेकिन अगर फिर भी नहीं मानेंगे तो कानून का डंडा चलेगा।”यही बयान एबीवीपी कार्यकर्ताओं को नागवार गुज़रा और विवाद भड़क गया।
एबीवीपी का गुस्सा और प्रदर्शन
लखनऊ विश्वविद्यालय गेट पर ABVP कार्यकर्ताओं ने ओपी राजभर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे की मांग की और नारेबाजी की। बुधवार रात को मंत्री आवास पर भी हंगामा हुआ और पत्थरबाजी की गई। ABVP कार्यकर्ता कार्तिक पांडे ने मीडिया से कहा ओपी राजभर दलबदलू नेता हैं, उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
मंत्री की डिप्टी सीएम से मुलाकात
विवाद बढ़ने पर ओपी राजभर ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन तस्वीरों में राजभर का गंभीर चेहरा और मौर्य की मुस्कुराहट ने कयासों को और हवा दी। सूत्रों के मुताबिक, मुलाकात में एबीवीपी विवाद और डैमेज कंट्रोल रणनीति पर चर्चा हुई।
बृजभूषण शरण सिंह का तंज
बीजेपी के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह से जब एबीवीपी विवाद पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा:“ऐसे हल्के व्यक्ति की बात का हम जवाब नहीं देते।”उनके इस बयान से साफ है कि अब विवाद सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा बल्कि बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुँच चुका है।
क्यों बढ़ सकती है बीजेपी की मुश्किलें?
एबीवीपी बीजेपी का छात्र संगठन है, और कार्यकर्ताओं की नाराज़गी सीधे भाजपा संगठन और आगामी चुनाव को प्रभावित कर सकती है। ओपी राजभर बीजेपी के सहयोगी दल सुभासपा के मुखिया हैं। यदि विवाद बढ़ा, तो यह एनडीए की एकता पर भी असर डाल सकता है। एबीवीपी ने साफ कहा है कि जब तक ओपी राजभर माफी नहीं मांगते, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। पार्टी नेतृत्व के लिए यह चुनौती है कि वे राजभर के बयान से उपजे नुकसान को कैसे काबू करें।
