बरेली: मध्य प्रदेश के ग्वालियर के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा पर दर्ज मुकदमे के विरोध में बुधवार को बरेली कलेक्ट्रेट पर ब्राह्मण समाज के सैकड़ों महिला और पुरुष एकत्र हुए। समाज के लोगों ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर अधिवक्ता मिश्रा के समर्थन में जोरदार आवाज उठाई।
संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता व्यक्त
ज्ञापन में कहा गया कि सर्व समाज भारत के संविधान, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक मूल्यों में पूरा विश्वास रखता है। हाल के दिनों में अधिवक्ता अनिल मिश्रा द्वारा समाज और विधि से जुड़े विषयों पर दिए गए वक्तव्यों के बाद उन्हें आलोचना, धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जो अत्यंत चिंता का विषय है।
लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप
ब्राह्मण समाज ने अपने ज्ञापन में कहा कि यह स्थिति न केवल एक व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि पूरे विधिक समुदाय और लोकतांत्रिक विमर्श के लिए खतरे की घंटी है। अधिवक्ता मिश्रा ने अपने वक्तव्यों में किसी भी प्रकार की असंवैधानिक या अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया, बल्कि एक नागरिक और अधिवक्ता के रूप में अपने विचार तार्किक ढंग से रखे।
राष्ट्रपति से निष्पक्ष कार्रवाई और सुरक्षा की मांग
ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई है कि अधिवक्ता अनिल मिश्रा के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई न की जाए। साथ ही उनकी जान और व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
‘अभिव्यक्ति एवं सुरक्षा दिशा-निर्देश नीति’ बनाने की मांग
ज्ञापन में केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया गया कि अधिवक्ताओं के लिए “अभिव्यक्ति एवं सुरक्षा दिशा-निर्देश नीति” बनाई जाए, ताकि वे निर्भीक और सुरक्षित माहौल में अपने विचार रख सकें।
बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्राह्मण समाज के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष सदस्य कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे और उन्होंने अधिवक्ता अनिल मिश्रा के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
