नई दिल्ली : राजस्थान लोक सेवा आयोग की सब-इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही एक दिन पुराने आदेश में बदलाव करते हुए सैकड़ों अभ्यर्थियों को दी गई राहत वापस ले ली है। अब इस नए आदेश के अनुसार, पहले जहां 713 अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी, वहीं अब यह राहत केवल एक अभ्यर्थी मुख्य याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा तक सीमित कर दी गई है।
दरअसल, आरपीएससी द्वारा 5 और 6 अप्रैल को इस भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 1,015 पदों पर भर्ती होनी है, जिसके लिए लगभग 7 लाख 70 हजार से अधिक उम्मीदवार आवेदन कर चुके हैं। यह भर्ती परीक्षा पहले ही विवादों में रह चुकी है। पेपर लीक और धांधली के आरोपों के चलते इसे रद्द कर दिया गया था। इसके बाद आयोग ने दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया।
हालांकि, नई परीक्षा तिथि घोषित होने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया। जिन अभ्यर्थियों ने पहले आवेदन किया था, उनमें से कई इस दौरान आयु सीमा पार कर चुके थे। ऐसे में उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे वे असंतुष्ट हो गए और अदालत का दरवाजा खटखटाया।
मामला सबसे पहले राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा, जहां सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी। लेकिन बाद में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद सूरज मल मीणा नामक अभ्यर्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को सुनवाई करते हुए 713 अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत प्रदान की और आरपीएससी को निर्देश दिया कि उन्हें प्रोविजनल एडमिट कार्ड जारी किए जाएं, ताकि वे परीक्षा में शामिल हो सकें।
लेकिन अगले ही दिन इस मामले में बड़ा मोड़ आ गया। आरपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की अपील करते हुए कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष सभी तथ्य पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किए गए थे और कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छूट गई थी। आयोग की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से विचार किया और छुट्टी के दिन विशेष बेंच का गठन कर मामले की दोबारा सुनवाई की। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने सुनवाई के बाद अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि 713 अभ्यर्थियों को दी गई राहत को जारी रखना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब केवल याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि, कोर्ट ने अन्य 712 अभ्यर्थियों के लिए न्याय का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये अभ्यर्थी राजस्थान हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। यदि हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय उनके पक्ष में आता है, तो आयोग को उनके लिए अलग से परीक्षा आयोजित करनी पड़ सकती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश के तहत जो भी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे, उनका परिणाम तब तक घोषित नहीं किया जाएगा, जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं आ जाता।
