IVRI में शुरू हुआ इंडियन मीट साइंस एसोसिएशन का 13वां राष्ट्रीय सम्मेलन, विशेषज्ञों ने कहा- स्मार्ट मीट सिस्टम और ट्रैसेबिलिटी होगी भविष्य की कुंजी
बरेली : भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI),इज़तनगर में गुरुवार को इंडियन मीट साइंस एसोसिएशन के 13वें राष्ट्रीय सम्मेलन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और पशु–उद्योग विशेषज्ञों ने मीट सेक्टर, प्रोटीन सप्लाई और आधुनिक तकनीक पर महत्वपूर्ण चर्चाएँ कीं।
IVRI का देश की पशु-स्वास्थ्य प्रणाली में बड़ा योगदान : डॉ. त्रिवेणी दत्त
संस्थान के निदेशक एवं कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान के 135 वर्षों के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया- IVRI ने 1889 से अब तक सैकड़ों शोध किए और 100 से अधिक टीके व निदान किट विकसित किए। देश से 4 प्रमुख बीमारियों के उन्मूलन में संस्थान की भूमिका निर्णायक रही। 13 जैविक उत्पाद देशभर में आपूर्ति किए जाते हैं। संस्थान 14 देसी नस्लों के जर्मप्लाज्म का संरक्षण करता है, इसके साथ ही हाल ही में NBAGR द्वारा मान्यता प्राप्त दो नई नस्लें भी विकसित की हैं। उन्होंने बताया कि IVRI राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोग निदान, प्रबंधन और वन्यजीव स्वास्थ्य के लिए प्रमुख केंद्र है।
“भारत को प्रोटीन संकट दूर करना है तो मीट उत्पादन बढ़ाना होगा”-डॉ. संजय कुमार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भारत में प्रोटीन और पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए मीट उत्पादन बढ़ाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारत 10.25 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर है, लेकिन प्रति व्यक्ति उपलब्ध पशु प्रोटीन अब भी अनुशंसित स्तर से काफी कम है। डॉ. संजय ने कहा कि विकसित देशों की तरह भारत को भी मीट सेक्टर में स्मार्ट मीट सिस्टम, ट्रैसेबिलिटी, ब्लॉकचेन, एआई आधारित प्रोसेसिंग, सेल-बेस्ड मीट और वैकल्पिक प्रोटीन अपनाने होंगे, तभी वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
मांस उत्पादन 10-15 साल में दोगुना करना होगा : IMSSA
इंडियन मीट साइंस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पी.के. मंडल ने कहा कि “भारत का वर्तमान मांस उत्पादन लगभग 10.2 मिलियन टन है। देश में पोषण और प्रोटीन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अगले 10–15 वर्षों में इसका दोगुना होना आवश्यक है। विशेषज्ञ डॉ. मेंदिरत्ता ने कहा कि भारत के मीट सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं। उत्पादकता में कमी, वहनीयता, उपलब्धता, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। उन्होंने कहा कि मीट सेक्टर को मजबूत करने के लिए नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक का समावेश और बेहतर प्रसंस्करण तंत्र को प्राथमिकता देनी होगी। सम्मेलन में इन सभी मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जाएगी और भविष्य के लिए उपयोगी सुझाव सामने आएंगे।
सम्मेलन में भविष्य की दिशा तय करने की उम्मीद
तीन दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिक, उद्यमी और मीट उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। संगोष्ठी का उद्देश्य भारत को वैश्विक प्रोटीन क्रांति में अग्रणी बनाने की रणनीतियों पर काम करना है।
