बरेली : भारतीय शिक्षा बोर्ड को लेकर GIC ऑडिटोरियम,में आयोजित संगोष्ठी में कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व IAS डॉ. N.P. सिंह ने कहा कि नया बोर्ड आधुनिक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा का संतुलित मॉडल पेश करेगा। उन्होंने बताया कि बोर्ड का उद्देश्य बच्चों में भारतीयता, नैतिकता, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक नागरिकता को विकसित करना है।

नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड को मान्यता
डॉ. सिंह ने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड को वर्ष 2019 में केंद्र सरकार की अनुमति मिली थी, और अब यह CBSE-ICSE जैसे अन्य बोर्डों के समकक्ष काम करेगा। देश के कई स्कूल पहले ही इस बोर्ड से जुड़ चुके हैं। पाठ्यक्रम में वेद, उपनिषद, गीता, जैन-बौद्ध दर्शन, भारतीय नायकों की गाथाएँ, और संवैधानिक मूल्य शामिल किए गए हैं। DM अविनाश सिंह ने कहा कि बच्चों में संस्कार, मूल्य और संस्कृति का बीज बचपन से डालना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि BSB का पाठ्यक्रम आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान और अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देता है और यह तैयारी UPSC, JEE, NEET जैसी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर भी बनाई गई है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड की यह हैं खास बातें
आधुनिक + पारंपरिक शिक्षा का समन्वय, वेद-उपनिषद-गीता को पाठ्यक्रम में स्थान मिलेगा। 120 राष्ट्रनायकों की गाथाएँ शामिल होंगी। तकनीकी व रोजगारपरक शिक्षा, शोध, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता पर फोकस होगा। कार्यक्रम में कई विद्यालयों के प्रबंधक, प्रधानाचार्य और पतंजलि व भारत स्वाभिमान से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
