बरेली : शहर की एक बड़ी FMCG कंपनी और उसके एमडी के खिलाफ कथित मिलावटी तेल बेचने और लोगों को गुमराह करने के आरोपों का मामला कोर्ट पहुंच गया है। एसीजेएम कोर्ट ने अधिवक्ता वीरेन्द्र पाल गुप्ता की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तारीख तय की है।
अधिवक्ता ने कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
अधिवक्ता वीरेन्द्र पाल गुप्ता ने कोर्ट में कहा कि कंपनी “कच्ची घानी सरसों तेल” और दूसरे रिफाइंड तेलों के नाम पर लोगों को भ्रमित कर रही है। उनका आरोप है कि कंपनी खुद सरसों या दूसरे बीजों से तेल नहीं निकालती, बल्कि अलग -अलग तरह के तेल खरीदकर उन्हें रिफाइन और पैक करके बाजार में बेचती है। इसके बावजूद कंपनी अपने तेल को “शुद्ध” और “कोल्ड प्रेस्ड” बताकर प्रचार कर रही है।
लोगों की सेहत से खिलवाड़ का आरोप
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि तेल बनाने की प्रक्रिया में ज्यादा गर्मी और कई तरह के रसायनों का इस्तेमाल होता है, जिससे तेल के प्राकृतिक गुण खत्म हो जाते हैं। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि ऐसे तेल लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं और हार्ट, बीपी, किडनी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि कंपनियां सस्ते पाम ऑयल जैसे तेल मिलाकर महंगे दामों में “कच्ची घानी” के नाम पर बेच रही हैं।
पुलिस से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की शिकायत पहले एसएसपी और थाना बारादरी पुलिस से भी की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि बड़ी कंपनियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिलने की वजह से मामले को दबा दिया जाता है। हालांकि पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले में अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।
कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने का दिया आदेश
इस मामले की सुनवाई के बाद एसीजेएम कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी खुद अदालत में अपने सबूत पेश कर सकता है और मामले की जांच कोर्ट के जरिए की जा सकती है। कोर्ट ने मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अब इस केस में 9 जून को अगली सुनवाई होगी, जिसमें प्रार्थी का बयान दर्ज किया जाएगा।
