बरेली : सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने और निलंबन के बाद उपजे विवाद के बीच जिला प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए अपर उप जिलाधिकारी (सदर) एसीएम रामजन्म यादव को नगर मजिस्ट्रेट (सिटी मजिस्ट्रेट) बरेली का प्रभारी दायित्व सौंप दिया है। डीएम अविनाश सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह जिम्मेदारी उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान पद के साथ अतिरिक्त रूप से दी गई है।
निलंबित PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के आवास पर नोटिस चस्पा
सिटी मजिस्ट्रेट पद से जुड़े घटनाक्रम के तीसरे दिन बुधवार सुबह जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के सरकारी आवास के गेट पर निलंबन संबंधी नोटिस चस्पा कर दिया। बुधवार सुबह एडीएम सिटी सौरभ दुबे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और नोटिस चस्पा कराया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल अलंकार अग्निहोत्री अब भी अपने सरकारी आवास में ही मौजूद हैं।
समर्थकों ने पूरी रात डाला डेरा
मंगलवार रात से ही अलंकार अग्निहोत्री के समर्थकों ने सिटी मजिस्ट्रेट आवास के सामने स्थित दामोदर पार्क में डेरा जमा रखा था। समर्थकों को आशंका थी कि उन्हें किसी गोपनीय स्थान पर ले जाया जा सकता है। हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ और बुधवार सुबह तक वह अपने आवास में ही रहे। आवास के आसपास समर्थकों की मौजूदगी के चलते पुलिस बल भी तैनात रहा। हालांकि, बुधवार सुबह निलंबित पीसीएस अफसर ने मीडिया से बात कर तमाम आरोप लगाए, और सरकार पर भी हमला बोला।
दिन में इस्तीफा, रात में निलंबन
सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट में ध्वजारोहण के बाद 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसके बाद उन्होंने यूजीसी बिल लागू होने और शंकराचार्य के कथित अपमान के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ खुलकर बयान दिए। इसी दिन देर शाम वह डीएम से मिलने उनके आवास पहुंचे। वहां से बाहर निकलने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास में 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया, जबकि डीएम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
देर रात शासन ने किया निलंबित
सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उसी दिन रात में निलंबित कर दिया गया था। उन्हें शामली कलेक्ट्रेट कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।।पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है। निलंबन के अगले दिन मंगलवार को अलंकार अग्निहोत्री का रुख और अधिक आक्रामक नजर आया। सुबह उन्हें समर्थकों के साथ उनके सरकारी आवास पर हाउस अरेस्ट किया गया था। करीब 11 बजे जब उन्होंने आवास के पहले गेट पर ताला देखा तो वह मुख्य गेट की ओर बढ़े। पुलिस ने गेट खोल दिया, जिसके बाद वह समर्थकों के साथ सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां गेट बंद किए जाने पर उन्होंने जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। समर्थकों के साथ उनका यह ‘हल्ला बोल’ करीब पांच घंटे तक चला। शाम को वह कलेक्ट्रेट से निकलकर दोबारा अपने सरकारी आवास लौटे, जहां उन्हें फिर से हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
बिना अतिरिक्त मानदेय निभाएंगे
नगर मजिस्ट्रेट का दायित्व जिलाधिकारी के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रामजन्म यादव को नगर मजिस्ट्रेट के इस अतिरिक्त दायित्व के लिए किसी प्रकार का अलग मानदेय नहीं मिलेगा। वह एसीएम सदर के कार्यों के साथ-साथ नगर मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
क्यों अहम है नगर मजिस्ट्रेट का पद
नगर मजिस्ट्रेट का पद कानून -व्यवस्था, नगर प्रशासन, राजस्व मामलों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मौजूदा हालात को देखते हुए जिला प्रशासन का यह फैसला शहर में प्रशासनिक संतुलन और व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
प्रशासन अलर्ट, हालात पर पैनी नजर
पूरा मामला लगातार सुर्खियों में रहने के चलते जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। सिटी मजिस्ट्रेट आवास और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अधिकारियों को किसी भी स्थिति से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।
