बरेली : यूपी के बरेली में 26 सितंबर को बवाल के बाद से बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) का बुल्डोजर शांत नहीं नहीं हो रहा है। मगर, अब यह शहर से देहात में पहुंच चुका है। मंगलवार को बीडीए के बुलडोजर ने फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र में विकसित होने वाली 3 अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया। यहां बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्य चल रहे थे। जिसके चलते टीम ने अवैध निर्माणों पर बड़ी कार्रवाई की। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने तीन अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया और दो निर्माणों को सील कर दिया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत की गई, जिसका उद्देश्य अवैध प्लॉटिंग और बगैर स्वीकृति के निर्माण कार्यों पर अंकुश लगाना है।

तीन अवैध कॉलोनियां चिह्नित कर ध्वस्त
BDA की टीम ने ग्राम चिटौली, थाना फतेहगंज पश्चिमी में तीन व्यक्तियों द्वारा विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया। इसमें पप्पू की लगभग 2500 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना स्वीकृति के सड़क, बाउंड्रीवाल और प्लॉट चिन्हांकन कर अवैध कॉलोनी विकसित कर रहे थे। इसके अलावा शिव अवतार शर्मा की लगभग 3000 वर्गमीटर क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण कार्य और इंद्रजीत की लगभग 6000 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृति के कॉलोनी का निर्माण कार्य हो रहा था। प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर इन सभी अवैध विकास कार्यों को ध्वस्त कर दिया।

दो अवैध निर्माणों पर सीलिंग की कार्रवाई
ध्वस्तीकरण के अलावा, प्राधिकरण ने दो निर्माणों को बिना मानचित्र स्वीकृति के व्यावसायिक/आवासीय निर्माण करने के आरोप में सील कर दिया। इसमें दौलत राम गुप्ता के बिना स्वीकृति के व्यावसायिक निर्माण और राजेश सिंह के बिना मानचित्र स्वीकृति के व्यावसायिक और आवासीय निर्माण कार्य को सील किया गया। इन दोनों के निर्माण कार्यों को सील कर दिया गया।
यह अधिकारी थे मौजूद
BDA की यह कार्रवाई अवर अभियंता संदीप कुमार, सहायक अभियंता धर्मवीर सिंह, और प्रवर्तन टीम की देखरेख में की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर आगे भी नियमित अभियान चलाया जाएगा। बरेली विकास प्राधिकरण ने आमजन को चेतावनी दी है कि “कोई भी व्यक्ति बिना मानचित्र स्वीकृति के प्लॉटिंग या भवन निर्माण करता है तो यह पूरी तरह अवैध है। ऐसी स्थिति में BDA किसी भी समय ध्वस्तीकरण या सीलिंग की कार्रवाई कर सकता है। प्राधिकरण ने यह भी अपील की कि “भविष्य में किसी परेशानी से बचने के लिए लोग भवन या भूखंड खरीदने से पहले उसकी मानचित्र स्वीकृति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।”
