नई दिल्ली : शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बहस हुई। सदन में माहौल कई बार तीखा रहा, लेकिन बहस का केंद्र रहा चुनावी प्रक्रिया, एसआईआर (सिस्टमैटिक वोटर वेरिफिकेशन), ईवीएम, वीवीपैट और वोट चोरी के विपक्षी आरोप। सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तृत और तीखे तर्कों के साथ जवाब दिया।
अमित शाह ने कहा कि एसआईआर पर चर्चा संभव नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग सरकार के अधीन नहीं आता और वह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। उन्होंने कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष जानबूझकर बहस को चुनाव सुधारों से हटाकर एसआईआर पर मोड़ रहा है, जबकि इसकी प्रक्रिया और अधिकार संविधान के अनुच्छेद 324 और 327 के तहत चुनाव आयोग के पास हैं। शाह ने कहा कि सरकार ने कभी चर्चा से भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि दो दिनों तक लगातार बहस की।
उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह अधिकार केवल भारत के नागरिकों का है और घुसपैठिये तय नहीं कर सकते कि देश का प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने वोटर लिस्ट में घुसपैठियों के शामिल होने को सबसे बड़ी समस्या करार दिया और कहा कि सरकार किसी भी हालत में अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची से बाहर करेगी।
अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह वोट चोरी का फर्जी नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है और तीन ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए इसका उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री पद के लिए वोटिंग के दौरान पटेल को 28 वोट और नेहरू को 2 वोट मिले, फिर भी नेहरू प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1975 में इंदिरा गांधी के मामले और सोनिया गांधी के मतदाता बनने के मुद्दे का भी जिक्र किया और कहा कि इसका सही समाधान केवल अदालत में ही हो सकता है।
ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि हर चुनाव में हारने के बाद विपक्ष ईवीएम पर सवाल उठाता है। उन्होंने याद दिलाया कि 1989 में ईवीएम का प्रावधान राजीव गांधी सरकार ने ही लाया था। 2004 और 2009 में ईवीएम से जीतने पर कांग्रेस ने कभी सवाल नहीं उठाए, लेकिन 2014 में उनकी जीत के बाद आरोप शुरू हुए। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि अब तक 16,000 वीवीपैट और ईवीएम के मिलान में एक भी वोट की गड़बड़ी नहीं मिली। शाह ने यह भी कहा कि पहले चुनाव जीतने का तरीका भ्रष्ट था, लेकिन ईवीएम के आने के बाद यह पूरी तरह बंद हो गया। सीसीटीवी फुटेज की मांग पर शाह ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के पास अधिकार है कि वह हाईकोर्ट में याचिका देकर चुनावी सीसीटीवी फुटेज निकलवा सकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ आरोप लगाता है लेकिन कानूनी अधिकार का इस्तेमाल नहीं करता।
अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर अमित शाह ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल न किया जाए। उन्होंने कहा कि बंगाल और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सरकार ने इस पर कड़ी कार्रवाई की है और किसी भी स्थिति में एक भी घुसपैठिये को वोट नहीं देने दिया जाएगा। विपक्ष द्वारा आरएसएस को लेकर लगाए गए आरोपों पर शाह ने कहा कि कोई कानून नहीं है कि आरएसएस का कोई व्यक्ति किसी संस्था में नहीं रह सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष आरएसएस का डर फैलाकर युवाओं को गुमराह करता है।
शाह ने कहा कि सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने, सीएए और राम मंदिर निर्माण जैसे राष्ट्रहित के निर्णय जनता से जनादेश लेकर लिए हैं। विपक्ष बार-बार चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर आरोप लगाकर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ जनता का जनादेश ईश्वर का आदेश है और इसे वोट चोरी कहना लोकतंत्र का अपमान है।