प्रयागराज : महाकुंभ के बाद आज से पहले माघ मेले की औपचारिक शुरुआत हो गई है। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम नगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पहले ही दिन अब तक 9 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। मेला प्राधिकरण का अनुमान है कि देर शाम तक श्रद्धालुओं की संख्या 15 लाख के पार जा सकती है।
श्रद्धालु संगम स्नान के बाद अक्षयवट और लेटे हनुमान जी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। हर-हर गंगे और जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज रहा है। संगम तट से लेकर प्रमुख मार्गों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। प्रशासन द्वारा बनाए गए स्नान घाटों पर लगातार श्रद्धालुओं का आवागमन जारी है।
इसी बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। पुलिस ने मेले के दौरान दो फर्जी बाबाओं को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से फर्जी आधार कार्ड और नकली नोट बरामद हुए हैं। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। वहीं महाकुंभ में ‘दातून बॉय’ के नाम से चर्चा में आए आकाश थार भी प्रयागराज पहुंच गए हैं। उन्होंने माघ मेले में दातून का कैंप लगाने की घोषणा की है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि सभी अफसर फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें और किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न होने पाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुरक्षा के लिहाज से माघ मेले में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी AI तकनीक से लैस सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है। इसके अलावा ATS और NIA के कमांडो भी सुरक्षा मोर्चे पर तैनात हैं। योगी सरकार माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है।
माघ मेला करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इसे 7 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। 8 किलोमीटर लंबे स्नान घाट बनाए गए हैं, वहीं महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के लिए विशेष चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। 2 जनवरी की रात 8 बजे से मेला क्षेत्र में वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है। संगम नोज पर केवल प्रशासकीय और चिकित्सीय वाहनों को ही जाने की अनुमति है, यह व्यवस्था 4 जनवरी की सुबह तक लागू रहेगी।
आज से कल्पवास की भी शुरुआत हो गई है। हजारों कल्पवासी अगले 45 दिनों तक गंगा तट पर रहकर पूजा-पाठ और साधना करेंगे। माघ मेले की विशेषता यह है कि इसमें अखाड़ों की पेशवाई नहीं होती। मेला 15 फरवरी तक चलेगा और इस दौरान श्रद्धा, सुरक्षा और व्यवस्था की परीक्षा प्रशासन के सामने बनी रहेगी।