ऑपरेशन कन्विक्शन की बड़ी सफलता, न्यायालय में पेश किए गए 15 गवाह
बरेली : यूपी के बरेली में 19 साल पुराने हत्या के मामले में जिला न्यायालय डीजे कोर्ट ने गुरुवार यानी आज अहम फैसला सुनाया है। हत्याकांड के आरोपी को आजीवन कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई अर्थदंड की राशि पीड़ित परिवार को देनी होगी। मगर, यह राशि अदा न करने पर तीन साल का अतिरिक्त कारावास होगा। शहर के कैंट थाना क्षेत्र के कांधरपुर गांव निवासी नरेश पाल की 17 अक्टूबर, 2005 को करीब आठ बजे गांव के ही चंद्रसेन उर्फ शेखर की गला दबाकर हत्या कर दी थी। मृतक की पत्नी सीमा ने यह शिकायत थाने में की। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल की। पीड़िता ने बताया कि आरोपी चंद्रसेन उर्फ शेखर पति को घर से बुलाकर ले गया और उसकी हत्या कर दी।
भारतीय दंड संहिता की धारा 302 में दर्ज किया केस
इस गंभीर वारदात के बाद थाना कैंट में मुकदमा संख्या 1103/2005 के तहत धारा 302 भारतीय दंड संहिता में केस दर्ज किया गया। मामला वर्षों तक विचाराधीन रहा। करीब दो दशकों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद, अभियोजन पक्ष की ओर से 15 गवाहों को प्रस्तुत किया गया। इसके बाद न्यायालय को दोष सिद्ध करने में निर्णायक मदद मिली। 24 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने आरोपी चंद्रसेन उर्फ शेखर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 20,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यदि आरोपी द्वारा अर्थदंड अदा नहीं किया जाता है, तो उसे अतिरिक्त तीन वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा।
सजा दिलाने में इनकी अहम भूमिका
इस केस में सजा दिलाने में एसपी सिटी एवं ऑपरेशन कन्विक्शन के नोडल अधिकारी मानव पारिक, एडीजीसी डिस्ट्रिक कोर्ट शीतलराज राजपूत, तत्कालीन सीओ अमित निरंजन, दुर्गेश कुमार मोहर्रिर, जिला एवं सत्र न्यायालय, कोर्ट पेशकर मोनू चौहान ने अहम भूमिका निभाई है।
