लखनऊ : यूपी के इटावा ज़िले के दारापुर गांव में एक भागवताचार्य मुकुट मणि यादव और उनके साथी संत सिंह यादव के साथ कथित तौर पर अभद्रता की गई, उनके बाल मुंडवा दिए गए और उन पर जाति को लेकर आरोप लगाए गए कि उन्होंने कथावाचन से पहले खुद को ब्राह्मण बताया जबकि वह दूसरी जाति से हैं। यह घटना 21 जून की रात को हुई और इसके बाद से गांव में तनाव का माहौल है।
राजनीतिक बवाल की शुरुआत:
इस घटना के बाद गगन यादव नामक व्यक्ति ने कथित रूप से “अहीर रेजिमेंट” से जुड़े लोगों से गांव में जुटने की अपील की। इस अपील के बाद भारी संख्या में लोग पहुंचे और पुलिस से झड़प व पथराव की घटनाएं हुईं। इस मामले में गगन यादव के खिलाफ FIR दर्ज हुई है, और अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अखिलेश यादव का तीखा हमला:
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया। उनका आरोप है कि BJP “प्लांटेड लोगों” के उपनाम का इस्तेमाल कर समाज में घुसपैठिया राजनीति कर रही है। यूपी में भरोसेमंद भाजपा नेता नहीं बचे, इसलिए बाहर से लोगों को लाकर षड्यंत्र रच रही है। यूपी की सीमाएं अब अगर अराजकतावादी तत्वों के लिए खुली हैं, तो भाजपा सरकार को स्पष्ट घोषणा करनी चाहिए या FIR दर्ज करके कार्रवाई करनी चाहिए।
‘ढोलक की थाप’ और सांस्कृतिक अपमान की बात
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि कुछ प्रभुत्ववादी ताकतों ने उस कलाकार को भी नहीं छोड़ा जो ढोलक बजाकर अपनी पहचान बनाता है। उनका कहना है कि”उस कलाकार की ढोलक छीनना और उस पर आरोप लगाना दर्शाता है कि कुछ लोग सांस्कृतिक सहिष्णुता के बजाय वर्चस्व की राजनीति में लिप्त हैं। यह हमारी भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।”
पीडीए समर्थकों को एकजुट किया
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने बयान में ‘पीडीए’ (पीड़ा, दुख और अपमान) को एक सामाजिक चेतना आंदोलन बताते हुए कहा पीडीए कोई प्रतिशोध नहीं, बल्कि सोच के परिवर्तन की पुकार है। यह सामाजिक न्याय, समानता, गरिमा और सम्मान के लिए संघर्ष करने वाला नया सामाजिक मोर्चा है। इटावा की घटना ने पीडीए समर्थकों को एकजुट कर दिया है।
