लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर सख्त और स्पष्ट शब्दों में प्रदेश सरकार की नीतियों व फैसलों की व्याख्या की और कानून तोड़ने वालों के प्रति कड़ी चेतावनी दी। उनकी भाषा में न केवल सुरक्षा और कड़े दंड की प्रतिज्ञा नजर आई बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति मिलने वाली सुविधा और कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र भी दिखा। आइए विस्तार से जानें मुख्यमंत्री के उन बिंदुओं को जो उन्होंने कार्यक्रम में रखे सुरक्षा, जनहितकारी योजनाएँ, सांस्कृतिक-सामाजिक संदेश और कानून व्यवस्था पर उनकी ठोस रीति।
सबसे पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी की सुरक्षा पर कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके शब्द सीधे और कटाक्षपूर्ण थे “अगर बेटी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया तो तय मानिए यमराज अगले चौराहे पर खड़े मिलेंगे।” यह चेतावनी उस जमीनी भय और चिंता के खिलाफ है जो समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्याप्त है। सीएम ने स्पष्ट किया कि बेटी के साथ कोई भी अनाचार या उपेक्षा सहन नहीं की जाएगी, और ऐसे किसी भी प्रयास का परिणाम भयावह होगा। उनका यह स्वर सरकारी-मज़बूती और असहिष्णुता की मिसाल के रूप में पेश किया गया राज्य दोषी तत्वों पर कठोर कार्रवाई करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि त्योहारों और सार्वजनिक उत्सवों में शांति और सौहार्द की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। “अगर कोई भी त्योहार में रंग में भंग डालने का प्रयास करेगा तो जेल की सलाखें उसका इंतजार कर रही होंगी,” उन्होंने कहा। यह वक्तव्य विशेषकर उन तत्वों के लिए चेतावनी था जो साम्प्रदायिक तनाव भड़काने या सामाजिक सौहार्द को भंग करने का प्रयास करते हैं। पिछले आठ वर्षों के अपने शासन काल का हवाला देते हुए सीएम योगी ने यह दावा दोहराया कि उत्तर प्रदेश में उनके शासनकाल में किसी भी समुदाय के पर्वों का आयोजन शांतिपूर्वक हुआ है और सरकार इस व्यवस्था को टूटने नहीं देगी।
सरकार की आलोचना करते हुए या पुराने शासनकालों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए सीएम ने कहा कि “पहले की सरकारें सिर्फ परिवार के बारे में सोचती थीं।” उनका तर्क था कि पारिवारिक स्वार्थ और सियासी संवर्धन के चलते विकास के संसाधनों का दुरुपयोग होता था, नौजवानों को नौकरियों में नुकसान उठाना पड़ता था और गुंडागर्दी को संरक्षण मिलता था। इस दावे के जरिए उन्होंने वर्तमान सरकार के जनहितकारी और पारदर्शी आचरण को रेखांकित करने का प्रयास किया एक ऐसी सरकार जो पूरे प्रदेश को परिवार मानकर सबके विकास पर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के कल्याण और सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और राज्य सरकार की मुफ्त गैस सिलेंडर वितरण योजनाओं का हवाला देते हुए बताया कि गरीबी में जीवन यापन कर रही महिलाओं की जीवन-शैली में सुधार लाने के लिए मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने से घरों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम घटे हैं। उनकी बातें इस निष्कर्ष पर आती हैं कि सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाएँ न केवल सुविधा देती हैं बल्कि महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य के लिए भी अहम हैं।
त्योहारी अवसरों में स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर सीएम ने जनता से खुलकर अपील की। दिवाली पर खरीदारी के दौरान ‘स्वदेशी’ चीजों को प्राथमिकता देने की उनसे अपील थी रोशनी, दीये, सजावटी सामान और पटाखों में स्थानिक उत्पादों को बढ़ावा देने की सोची-समझी सलाह दी गई। साथ ही उन्होंने लोगों से पर्व के समय किसी गरीब परिवार की सहायता करने की सामाजिक जिम्मेदारी उठाने की भी अपील की। यह संदेश आर्थिक समेकन और स्थानीय उद्योग के समर्थन का भी प्रतिनिधि रहा।
विधानसस्थलीय सुरक्षा पर उन्होंने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए बरेली के बवाल का हवाला दिया। उस घटना के बाद सरकार की प्रतिक्रिया सख्त रही मुख्यमंत्री की भाषा में “लातों के भूत बातों से नहीं मानते” वाली टिप्पणी खासकर उन उपद्रवियों को चेतावनी देने के मकसद से कही गई। उनका संकेत था कि अब वह दौर नहीं जब अराजकता को अनदेखा किया जाता था या उससे समझौता किया जाता था। कानून-व्यवस्था स्थापित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने में देरी नहीं की जाएगी और उपद्रवियों के प्रति अनुशासनात्मक रवैया अख्तियार किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों का भी सीएम ने समर्थन किया, खासकर उज्ज्वला योजना का ज़िक्र करके। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले गरीब महिलाओं को लकड़ी-कोयले पर खाना पकाने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था, और गैस कनेक्शन मिलने से यह पीड़ा कम हुई। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार 2021 के बाद से साल में दो गैस सिलेंडर मुफ्त देने का निर्णय लेकर लोकलाभ का दायित्व निभा रही है जो कि सामाजिक कल्याण की दिशा में ठोस कदम माना गया।
इन सभी बातों के बीच सीएम योगी की भाषा दोहरा संदेश देती दिखी सख्ती और दया का संतुलन। जहां कानून और सुरक्षा के उल्लंघन पर कड़ाई बरतने की बात कही गई, वहीं समाज के कमजोर व वंचित तबकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं और सहयोग का भरोसा भी दिलाया गया। उनका कहना था कि सरकार न केवल दंडात्मक कदम उठाएगी, बल्कि जरूरतमंदों तक संसाधन पहुँचाने की भी जिम्मेदारी निभाएगी।
अंततः मुख्यमंत्री ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था दोनों ही आवश्यक हैं। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि पर्व और उत्सव प्रेम, सम्मान और सुरक्षा के साथ मनाने चाहिए न कि तनाव और असमर्थितता के साथ। उनके शब्दों में यह भी स्पष्ट था कि सरकार किसी भी हाल में कानून हाथ में लेने वालों और समाज को अशांत करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस प्रकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह भाषण न केवल सुरक्षा और कड़े नियमों की घोषणा था, बल्कि जनकल्याणकारी नीतियों की उपलब्धियों और सौहार्दपूर्ण समाज की अपील का एक समेकित संदेश भी था एक ऐसा संदेश जिसमें सत्ता की कठोरता और लोकहित की व्यापकता दोनों के तत्व मौजूद थे।
