दरगाह आला हज़रत में उर्स तैयारियों को लेकर बड़ी बैठक, जुलूस कमेटियों से सादगी, अनुशासन और समाजसेवा का संदेश, तय रूट से ही चादर जुलूस निकालने की अपील
बरेली : उर्स-ए-रज़वी की तैयारियां तेज़ हो गई हैं।देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीन की सहूलियत और बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर शुक्रवार को दरगाह आला हज़रत में जुलूस कमेटियों, वालंटियर्स और लंगर कमेटियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने की। इस दौरान उन्होंने उर्स में शामिल होने वाले सभी जुलूसों से डीजे का इस्तेमाल न करने, कपड़े की लंबी चादरों की बजाय फूलों की डली पेश करने और समाजसेवा को बढ़ावा देने की अपील की। दरगाह प्रशासन के अनुसार उर्स की तैयारियां दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती तथा मुफ्ती अहसन मियां और सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में चल रही हैं। उर्स की सभी प्रमुख रस्में दरगाह आला हज़रत और इस्लामिया मैदान में अदा की जाएंगी।
उर्स का उद्देश्य अमन, मोहब्बत और इंसानियत

बैठक को संबोधित करते हुए मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि उर्स का उद्देश्य अमन, मोहब्बत और इंसानियत का संदेश देना है। ऐसे में चादर जुलूसों में डीजे और शोर-शराबे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि डीजे फिजूलखर्ची को बढ़ावा देता है, इसलिए इसकी जगह सीमित ध्वनि व्यवस्था (एक या दो साउंड बॉक्स/सुराही) का ही उपयोग किया जाए और सभी जुलूस अपने पूर्व निर्धारित मार्गों से ही दरगाह तक पहुंचें। उन्होंने अकीदतमंदों से अपील की कि महंगी कपड़े की चादरों की बजाय फूलों की डली पेश करें। साथ ही जुलूसों में हज़रत मुहम्मद की शिक्षाओं से जुड़ी तख्तियां लेकर चलें, ताकि समाज में शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश पहुंचे।
गरीब स्कूली बच्चों की करें मदद

सज्जादानशीन अहसन मियां ने कहा कि कपड़े की चादरों और डीजे पर होने वाले खर्च को जरूरतमंद मदरसों और गरीब स्कूली बच्चों की फीस, किताबों, बीमारों के इलाज तथा बेसहारा परिवारों के राशन जैसी सामाजिक और मानव सेवा के कार्यों में लगाया जाए। यही इस्लाम की वास्तविक शिक्षा और इंसानियत की सेवा है। दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि बैठक में वालंटियर्स और लंगर कमेटियों ने उर्स के दौरान साफ-सफाई, जायरीनों की सुविधा, लंगर व्यवस्था,अनुशासन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अपने सुझाव दिए। कार्यक्रम का संचालन शाहिद नूरी ने किया और जिलेभर से आई लंगर कमेटियों का आभार व्यक्त किया।
दरगाह के ये जिम्मेदार थे मौजूद
बैठक में मौलाना बशीर उल क़ादरी, मास्टर कमाल, औरंगज़ेब नूरी, परवेज़ नूरी, मुफ्ती आकिल रज़वी, मुफ्ती कफील हाशमी, मुफ्ती अय्यूब नूरी, मुफ्ती ज़ईम रज़ा सहित बड़ी संख्या में उलेमा, वालंटियर्स, जुलूस कमेटियों के पदाधिकारी और अकीदतमंद मौजूद रहे। अंत में मुल्क में अमन, खुशहाली और इंसानियत के लिए खुसूसी दुआ कर लंगर वितरित किया गया। उर्स -ए- रज़वी की तैयारियों के बीच दरगाह आला हज़रत का यह संदेश साफ है कि धार्मिक आयोजनों में सादगी, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और मानव सेवा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि उर्स का वास्तविक उद्देश्य समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
