इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सपा सांसद ने विवादित नारे से बनाई दूरी, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों पर सख्त कानून की मांग
संभल: इलाहाबाद हाईकोर्ट से मौलाना तौकीर रजा को जमानत नहीं मिलने के बाद इस मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे की तुलना ‘अल्लाहु अकबर’ या ‘जय श्री राम’ जैसे धार्मिक नारों से किए जाने पर टिप्पणी की। इस बीच समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि तौकीर रजा की जमानत खारिज होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने तौकीर रजा के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई की है।
विवादित नारे से बर्क ने बनाई दूरी
जियाउर्रहमान बर्क ने ‘सर तन से जुदा’ जैसे विवादित नारे से स्पष्ट दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि वह इस तरह के शब्दों का समर्थन नहीं करते हैं। बर्क के मुताबिक, मुस्लिम समाज के लिए ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘आई लव मोहम्मद’ जैसे धार्मिक नारे पवित्र भावनाओं से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि किसी सरकार को इन धार्मिक नारों को लोगों से छीनने का अधिकार नहीं है। सपा सांसद ने यह भी मांग की कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान या कृत्य पर सरकार और न्यायपालिका को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
परिवार और समर्थक जमानत के लिए कर रहे प्रयास
बर्क ने बताया कि मौलाना तौकीर रजा के परिवार, शुभचिंतक और समर्थक उनकी जमानत के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमानत का मामला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और आगे कानूनी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद ने यह भी कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए विशेष कानून की मांग
जियाउर्रहमान बर्क ने दावा किया कि वह लोकसभा और विधानसभा में भी धार्मिक भावनाओं के अपमान के खिलाफ विशेष कानून बनाए जाने की मांग उठा चुके हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में प्रभावी कानूनी व्यवस्था की जरूरत बताई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय पर सरकार को घेरा
सपा सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने के ऐलान पर भी सवाल उठाए। बर्क ने पूछा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने में सरकार को करीब 10 साल का समय क्यों लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही इस तरह की घोषणाएं की जा रही हैं। बर्क ने आशंका जताई कि जब तक मानदेय बढ़ाने की कागजी प्रक्रिया पूरी होगी, तब तक चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है।
शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग
जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि यदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की जरूरत थी तो सरकार को यह फैसला पहले ही कर लेना चाहिए था। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षामित्रों के मानदेय में भी बढ़ोतरी करने की पुरजोर मांग उठाई। उनका कहना है कि लंबे समय से शिक्षामित्र भी मानदेय बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं और सरकार को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। तौकीर रजा की जमानत के मामले से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षामित्रों के मानदेय तक, सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा है।
