फर्जी सीबीआई, ईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर करते थे वीडियो कॉल, फर्जी वारंट दिखाकर 57.89 लाख रुपये की ठगी का आरोप
पीलीभीत: डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर लोगों से लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ पीलीभीत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गिरोह के खिलाफ प्रदेश की पहली गैंगस्टर कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना मनीष कुमार समेत छह आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाजविरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य खुद को फर्जी सीबीआई, ईडी, सीबीसीआईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते थे। इसके बाद फर्जी वारंट और डिजिटल अरेस्ट जैसे काल्पनिक कानूनी प्रावधानों का भय दिखाकर पीड़ितों से रकम अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित करा लेते थे।
जगमोहन सैनी से 57.89 लाख रुपये की ठगी
मामला कोतवाली क्षेत्र की जेल लाइन निवासी जगमोहन सैनी से हुई साइबर ठगी की जांच के दौरान सामने आया। जगमोहन सैनी ने 21 दिसंबर 2024 को साइबर अपराध पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, 9 अगस्त से 22 अगस्त 2024 के बीच अज्ञात लोगों ने उन्हें और उनकी पत्नी को व्हाट्सऐप पर वीडियो और ऑडियो कॉल की। आरोपियों ने खुद को सीबीसीआईडी, सीबीआई, उच्चतम न्यायालय और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। आरोपियों ने फर्जी वारंट भेजकर कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर अलग-अलग बैंक खातों में रकम स्थानांतरित कराई गई। पुलिस के मुताबिक, इस तरह पीड़ित से कुल 57 लाख 89 हजार 776 रुपये की ठगी की गई।
जांच में छह आरोपियों के नाम सामने आए
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस के सामने मनीष कुमार, विकास वर्मा, राजेंद्र शर्मा उर्फ राजन, प्रशांत चौहान, संजय बाबी देशवाल और फैसल सिद्दकी के नाम सामने आए। साइबर अपराध पुलिस टीम ने पांच आरोपियों मनीष कुमार, विकास वर्मा, राजेंद्र शर्मा उर्फ राजन, प्रशांत चौहान और संजय बाबी देशवाल को 5 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद फैसल सिद्दकी को भी 24 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया।
मोबाइल से लेकर फर्जी आधार कार्ड तक बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 मोबाइल फोन, चार लाख रुपये नकद, 13 फर्जी आधार कार्ड, चार चेकबुक, दो पासबुक, तीन एटीएम कार्ड और तीन सिम कार्ड बरामद किए थे। पुलिस के मुताबिक, विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
डिजिटल अरेस्ट गिरोह पर प्रदेश की पहली गैंगस्टर कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों के खिलाफ प्रदेश में यह पहली गैंगस्टर कार्रवाई है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध के इस नए तरीके के जरिए लोगों को फर्जी जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर डराया जाता था और उनसे बड़ी रकम ठगी जाती थी। इस कार्रवाई के बाद फर्जी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को भयभीत करने और साइबर ठगी करने वाले गिरोहों पर पुलिस की कार्रवाई और सख्त होने की उम्मीद है। पुलिस का कहना है कि ऐसे गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
