मेरठ/लखनऊ/बरेली/गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत लगे कर्मचारियों पर काम के अत्यधिक दबाव और तनाव का असर दिख रहा है। अब तक चार SIR ड्यूटी कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। फतेहपुर के लेखपाल और गोंडा के टीचर ने आत्महत्या की, लखनऊ में शिक्षामित्र की ब्रेन हैमरेज से मौत हुई, वहीं बरेली में BLO की हार्ट अटैक से जान चली गई। नोएडा में दो महिला टीचर्स ने अत्यधिक काम के दबाव में इस्तीफा दे दिया।
गाजियाबाद में बीएलओ ड्यूटी में लगे 21 कर्मचारियों पर जिला प्रशासन ने FIR दर्ज की है। सिहानीगेट थाना में दर्ज FIR में चार शिक्षक भी शामिल हैं। इस बीच लखनऊ में युवा कांग्रेस के नेताओं और पुलिस के बीच टकराव हुआ। कांग्रेस कार्यालय से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालते हुए प्रदर्शनकारी ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ का नारा लगा रहे थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन कांग्रेसी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें घसीट-घसीटकर नीचे उतारा और वैन में बैठाया।
गोंडा के टीचर विपिन यादव के सुसाइड के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि OBC वोटरों के नाम काटो, वरना नौकरी चली जाएगी। दबाव, धमकी… और नतीजा? आखिर में आत्महत्या। SIR के नाम पर पिछड़े–दलित–वंचित–गरीब वोटरों को लिस्ट से हटाकर BJP अपनी मनमाफिक वोटर लिस्ट तैयार कर रही है। ECI लोकतंत्र की हत्या की जिम्मेदार है।
SIR ड्यूटी कर्मचारियों पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। मृतक और इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच तनाव और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। उत्तर प्रदेश में SIR अभियान के चलते कर्मचारियों की जान और मानसिक स्वास्थ्य संकट में है, वहीं राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप और विरोध प्रदर्शन इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रहे हैं।
