KGMU में सिफारिश भी बेअसर, DM ने घर पहुंच लौटवाई पायल और दी 50 हजार की आर्थिक मदद
पीलीभीत : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से एक मार्मिक और सिस्टम पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बेबस मां को अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए अपनी चांदी की पायल तक बेचनी पड़ गई। मामला तब और गंभीर हो गया, जब राज्यमंत्री की सिफारिशी चिट्ठी भी लखनऊ के बड़े अस्पताल KGMU में बेअसर साबित हुई।
इलाज के लिए दर-दर भटकी मां
शहर के वल्लभनगर की रहने वाली रामकली अपने बेटे श्याम सुंदर की किडनी के इलाज के लिए परेशान थी। आर्थिक तंगी से जूझ रही रामकली ने मदद के लिए राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार से गुहार लगाई।मंत्री की ओर से KGMU के लिए सिफारिशी पत्र भी दिया गया, लेकिन अस्पताल में उसे कोई राहत नहीं मिली।
पायल बेचकर जुटाए इलाज के पैसे
अस्पताल से निराश लौटने के बाद मजबूर मां ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी चांदी की पायल बेच दी। यह घटना तब सामने आई जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
वायरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासन
मामला तूल पकड़ने के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह तुरंत एक्शन में आए। वह स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
पायल वापस, 50 हजार की मदद
डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने महिला की बिकी हुई पायल वापस दिलवाई। इसके साथ ही रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से परिवार को 50,000 की आर्थिक सहायता दी गई। प्रशासन ने नया राशन कार्ड बनवाया और स्वास्थ्य विभाग को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मानवीय पहल की सराहना, सिस्टम पर सवाल
जहां एक ओर प्रशासन की संवेदनशीलता की सराहना हो रही है, तो वहीं यह घटना सिस्टम की खामियों को भी उजागर करती है। सवाल उठ रहा है कि क्या गरीबों को मदद के लिए पहले वायरल होना जरूरी है? और क्या सिफारिशी पत्र अब केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
