कांग्रेस के प्रदेश सचिव आशिक अली का बड़ा बयान- “कानपुर FIR देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब पर हमला”,रात में भी किया प्रदर्शन
बरेली/कानपुर/लखनऊ : यूपी के कानपुर में “I Love Muhammad (आई लव मुहम्मद) ” को लेकर तथाकथित एफआईआर का मामला तूल पकड़ने लगा है। शनिवार को बरेली में कांग्रेस के प्रदेश सचिव आसिफ अली ने कानपुर में पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद पर आस्था व्यक्त करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज की गई FIR को “संविधान और भाईचारे पर हमला” बताया है। उन्होंने नारेबाजी के बाद कलेक्ट्रेट में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिया। इससे पहले शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद मुस्लिम संगठन और दरगाह से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया था। इसके साथ ही आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने मीडिया से बात कर नबी की शान में गुस्ताखी पर नाराजगी जताई, तो वहीं मुस्लिमों के सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी थी।
“I Love Muhammad” लिखी तख्तियां हाथ में
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आशिकाने रसूल के हाथ में I Love Muhammad” लिखी तख्तियां थीं। इससे पहले शुक्रवार देर शाम भी समर्थकों के साथ “I Love Muhammad” लिखी तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। आसिफ अली ने कहा कि ऐसे पुलिस अधिकारी जो नफरत फैलाने वाली विचारधारा रखते हैं, उन्हें किसी संवैधानिक पद पर बने रहने का हक़ नहीं है। इन्हें तुरंत नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और इस तरह की हरकत न कर सके।
पैगंबर मोहम्मद पूरी दुनिया के रहमत
उन्होंने आगे कहा कि पैगंबर मुहम्मद केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता और पूरी कायनात के लिए रहमत बनकर आए हैं। इस पर प्रेम जताना किसी भी हाल में अपराध नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट और संविधान का दिया हवाला
कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है।”उन्होंने 1978 के ऐतिहासिक मामले “मेन्का गांधी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” का हवाला दिया और कहा कि FIR दर्ज कर इस तरह के विरोध को दबाना नागरिक अधिकारों का हनन है। आशिक अली ने अनुच्छेदों का ज़िक्र करते हुए कहा- अनुच्छेद 19(1)(a): हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। अनुच्छेद 25: धर्म पालन और प्रचार की स्वतंत्रता। अनुच्छेद 21 जीवन और गरिमा का अधिकार। “धार्मिक आस्था और प्रेम की अभिव्यक्ति को अपराध मानना पूरी तरह असंवैधानिक है।”
पुलिस कार्रवाई का किया विरोध
इस मामले की शुरुआत 5 सितंबर बारावफात (ईद -ए- मिलादउन्नवी) जुलूस से हुई थी। आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों ने जुलूस के दौरान हिंदू धार्मिक पोस्टर फाड़ दिए, जिसके बाद तनाव फैल गया। पुलिस ने माहौल बिगाड़ने के आरोप में 26 लोगों पर FIR दर्ज की थी। स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने इस कार्रवाई का विरोध किया और इसे “एकतरफा” बताया। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए धार्मिक पोस्टर और साइन बोर्ड हटवा दिए, जिससे माहौल शांत कराया जा सका। आशिक अली ने मांग की कि नफरत फैलाने वाले पुलिस अधिकारियों को चिन्हित कर तुरंत बर्खास्त किया जाए। गंगा-जमुनी तहज़ीब को नुकसान पहुंचाने वाली हर सोच पर कड़ी कार्रवाई हो। संविधान और भाईचारे की मूल भावना की रक्षा हो। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देता रहा है और कांग्रेस किसी भी कीमत पर नफरत की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी।
