बिना जांच 14 लोगों को बना दिया ‘दिव्यांग’, सरकारी सुविधाएं भी उठाईं, अब स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
शाहजहांपुर/ लखनऊ : यूपी के शाहजहांपुर जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में मंगलवार दोपहर को 12 कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) देवेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि जांच में सामने आया कि 14 लोगों के दिव्यांग प्रमाण पत्र बिना किसी मेडिकल परीक्षण के जारी किए गए। लाभार्थी न तो दिव्यांग थे और न ही बोर्ड के सामने पेश हुए। फिर भी उनका डेटा सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। हालांकि, बाद में इन लोगों ने दिव्यांग परिचय पत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ भी लेना शुरू कर दिया।
शिकायत के बाद खुला पूरा खेल

यह मामला तब सामने आया जब जिले के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई। जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी ने 12 कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। इनमें दिव्यांग विभाग के सेवानिवृत्त कनिष्ठ सहायक आरके मिश्रा, वरिष्ठ सहायक सतीश चंद्र, डीआईसी मैनेजर संतोष कुमार सिंह, डाटा एंट्री ऑपरेटर रोहित कुमार मिश्रा, कंप्यूटर सहायक अर्जुन श्रीवास्तव, डाटा एंट्री ऑपरेटर सुबोध कुमार सिंह, प्रोग्राम सहायक आउटसोर्सिंग पटल सहायक दीप सिंह, ब्लॉक डाटा मैनेजर शशांक गौरव, डाटा एंट्री ऑपरेटर शुभम गंगवार, डाटा एंट्री ऑपरेटर वीर सिंह, ब्लॉक डाटा मैनेजर दीप सिंह और डाटा एंट्री ऑपरेटर रवि कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह मुकदमा कठोर धाराओं में दर्ज कराया गया है। इसके साथ ही आरोप है कि 30 लाख का एक और घोटाला उजागर हुआ है।
12 सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर भी केस दर्ज
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के मामले में पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। यह मुकदमा शहर कोतवाली में हुआ है। इसके अलावा अस्पतालों के बिल लगाकर घोटाले का भी आरोप है।आरोप है कि लाखों रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति निकाली गई। हालांकि, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी
