इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत, अभियोजन ने बताया हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता, फतेहगढ़ जेल में बंद हैं आईएमसी प्रमुख
प्रयागराज/लखनऊ : बरेली हिंसा मामले में आरोपी और मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने निर्णय सुनाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि 26 सितंबर को बरेली में जुमा नमाज के बाद हुई हिंसा सुनियोजित थी। हिंसा के दौरान शहर के कई इलाकों में आगजनी, फायरिंग और पुलिस पर हमले किए गए थे। अभियोजन का दावा था कि पूरे घटनाक्रम के पीछे मौलाना तौकीर रजा की प्रमुख भूमिका थी, और उन्हें हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता माना गया है।
बरेली बवाल के बाद दर्ज हुए थे दर्जन भर मुकदमें
अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि हिंसा से जुड़े कुल 10 मुकदमे दर्ज किए गए हैं,जिनमें मौलाना तौकीर रजा नामजद आरोपी हैं। पुलिस की जांच में भी उन्हें हिंसा का मास्टरमाइंड बताया गया है। वहीं बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि मौलाना तौकीर रजा को राजनीतिक दबाव और साजिश के तहत फंसाया गया है।उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
फतेहगढ़ जेल में हैं बंद
बरेली हिंसा के मामले में गिरफ्तार मौलाना तौकीर रजा वर्तमान में फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार में निरुद्ध हैं। उनके खिलाफ बरेली के बारादरी, कोतवाली, कैंट, किला और प्रेमनगर थाना क्षेत्रों में विभिन्न मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत से उन्हें राहत नहीं मिल सकी। हाईकोर्ट के इस फैसले को बरेली हिंसा मामले की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया निचली अदालत और संबंधित न्यायिक मंचों पर जारी रहेगी।
