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दिल्ली : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 80(1)(a) की उपधारा (3) के तहत राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को नामांकित किया है। यह नियुक्तियाँ उन सीटों पर हुई हैं, जो पूर्व मनोनीत सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त हुई थीं। इसमें उज्ज्वल देवराव निकम (वरिष्ठ सरकारी वकील), डॉ. मीनाक्षी जैन (इतिहासकार और शिक्षाविद्), हर्षवर्धन श्रृंगला (पूर्व विदेश सचिव और राजनयिक) और सी. सदानंदन मास्टर (केरल के सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नेता) शामिल हैं।
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उज्ज्वल निकम: आतंक के खिलाफ न्याय की मिसाल
मार्च 1953 में महाराष्ट्र के जलगांव में जन्मे उज्ज्वल निकम देश के सबसे चर्चित कानूनी चेहरों में से एक हैं। उनके पिता देवरावजी निकम भी बैरिस्टर और जज रहे थे। उज्ज्वल निकम ने 1979 में जलगांव की जिला अदालत से वकालत शुरू की। 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस और 26/11 आतंकी हमले जैसे बहुचर्चित मामलों में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पैरवी की। अगर, उनके प्रमुख आंकड़े देखें, तो 628 लोगों को उम्रकैद,37 लोगों को फांसी की सज़ा दिला चुके हैं। 2016 में पद्मश्री सम्मान मिला था। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मुंबई उत्तर मध्य सीट से उतारा था, लेकिन वे हार गए। अब राष्ट्रपति ने उनके कानूनी योगदान को देखकर उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है।
डॉ. मीनाक्षी जैन: वैकल्पिक इतिहास की प्रभावशाली आवाज़
दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज की पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी जैन को उनके हिंदू सभ्यता, मंदिर इतिहास और सांस्कृतिक विमर्श पर शोध के लिए जाना जाता है। उन्होंने राम जन्मभूमि विवाद और धार्मिक स्थलों के विध्वंस जैसे विषयों पर महत्त्वपूर्ण किताबें लिखी हैं। उनके काम ने मुख्यधारा इतिहास लेखन को एक नया दृष्टिकोण दिया है।
हर्षवर्धन श्रृंगला: विदेश नीति के अनुभवी रणनीतिकार
पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक हर्षवर्धन श्रृंगला ने भारत का अमेरिका, बांग्लादेश और थाईलैंड में बतौर राजदूत प्रतिनिधित्व किया। 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान वे मुख्य समन्वयक थे। उनके अनुभव से राज्यसभा में भारत की वैश्विक नीति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सी. सदानंदन मास्टर: संघर्ष, साहस और समाज सेवा की कहानी
केरल के पूर्व शिक्षक और भाजपा नेता सदानंदन मास्टर राजनीतिक हिंसा के शिकार रहे हैं। 25 जनवरी 1994 को माकपा कार्यकर्ताओं ने उनके दोनों पैर काट दिए थे, जब वे पेरिंचरी गांव में सेवा कार्य कर रहे थे। इस हिंसा के बावजूद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक कार्य जारी रखा। भाजपा ने उन्हें 2021 के विधानसभा चुनावों में टिकट भी दिया था।
संविधान के प्रावधान और महत्व
संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति 12 ऐसे व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नामांकित कर सकते हैं, जो कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा में विशिष्ट योगदान दे चुके हों। राष्ट्रपति मुर्मू के इस चयन से स्पष्ट है कि यह नामांकन न केवल सम्मान की प्रक्रिया है, बल्कि यह संसद में विविध दृष्टिकोणों और अनुभवों की आवाज़ को शामिल करने का माध्यम भी है।
