कोर्ट में 8 अगस्त को अगली सुनवाई
लखनऊ/प्रयागराज : पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला गुजारा भत्ता (maintenance allowance) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया। यहां पति आलोक मौर्या ने याचिका दायर कर पत्नी से आर्थिक सहयोग की मांग की है। आलोक मौर्या, जो पंचायत विभाग में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपनी पत्नी ज्योति को शादी के बाद पढ़ाया-लिखाया, कोचिंग करवाई और पीसीएस अफसर बनने तक पूरा साथ दिया।
साल 2010 में शादी, 2015 में ज्योति मौर्या का PCS में चयन
आलोक का आरोप है कि सफलता के बाद ज्योति ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया और अब आर्थिक सहयोग भी देने से इंकार कर रही हैं। पहले पारिवारिक न्यायालय में याचिका दी गई थी, जहां से राहत न मिलने पर अब हाईकोर्ट का रुख किया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई कर ज्योति मौर्या को नोटिस भेजा है और 8 अगस्त 2025 की अगली सुनवाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने ज्योति से जवाब तलब किया है कि आखिर क्यों वह अपने पति को आर्थिक सहायता नहीं दे रहीं।
मामले में नया ट्विस्ट: एक पीपीएस अफसर का जिक्र
आलोक मौर्या का यह भी आरोप है कि ज्योति मौर्या के संबंध एक पीपीएस अफसर से हैं और दोनों ने मिलकर उनके खिलाफ साजिश भी रची थी। 2023 में यह मामला मीडिया की हेडलाइंस में था। उस वक्त ज्योति मौर्य बरेली की सहकारी समिति शुगर मिल, सेमीखेड़ा में थीं। इसमें दोनों पक्षों ने गंभीर आरोप -प्रत्यारोप लगाए थे।
आलोक मौर्या बोले : “मैंने जीवन बनाया, अब साथ भी चाहिए”
आलोक का कहना है कि “मैंने अपनी पत्नी को अधिकारी बनाने के लिए सब कुछ किया। अब जब वह संपन्न हैं, तो क्या मुझे बेसहारा छोड़ देना सही है?”। उन्होंने ‘भरण-पोषण कानून’ के तहत गुजारा भत्ता की मांग की है।
