पटना : महागठबंधन यानी इंडिया गठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है और इसे नाम दिया गया है “तेजस्वी का प्रण पत्र.” महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए गए तेजस्वी यादव ने सभी सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं के साथ यह घोषणा पत्र जनता के सामने पेश किया. इस मौके पर तेजस्वी यादव ने कहा कि आज का दिन हमारे लिए बेहद खास है क्योंकि अब बिहार को बदलने और उसे नंबर वन राज्य बनाने की हमारी प्रतिज्ञा लिखित रूप में पूरे राज्य के सामने है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक घोषणा पत्र नहीं है, बल्कि यह जनता से किया गया वादा और हमारे दिलों का संकल्प है. बिहार को नई उंचाइयों पर ले जाने के लिए चाहे प्राण देने पड़े, यह संकल्प पूरा होगा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने एनडीए और भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी शक्तियां बिहार को उपनिवेश बनाना चाहती हैं, मगर ऐसा किसी भी हालत में होने नहीं दिया जाएगा. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर कहा कि भाजपा ने उन्हें कठपुतली बनाकर सिर्फ एक चेहरा भर बना दिया है. अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि एनडीए का मुख्यमंत्री विधायक दल चुनेगा यानी नीतीश कुमार को वह मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते. तेजस्वी यादव ने कहा कि जब महागठबंधन अपना सीएम फेस घोषित कर चुका है तो भाजपा आज तक यह बताने में असमर्थ है कि उनका नेतृत्व कौन करेगा. यह उनकी भ्रम और विजन की कमी दिखाता है.
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि आने वाले पांच वर्षों में बिहार की नई तस्वीर तैयार होगी. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं से जब बिहार में विकास या युवाओं के लिए रोडमैप पर सवाल पूछा जाता है तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता. बिहार की जनता रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन की आकांक्षा रखती है जबकि वर्तमान सरकार सिर्फ नकारात्मक राजनीति में लगी हुई है. तेजस्वी ने कहा कि एनडीए विजनलेस गठबंधन है क्योंकि उनमें बिहार को आगे बढ़ाने की इच्छा और योजना दोनों की कमी है.
चुनाव को लेकर सुरक्षा और मतदान में गड़बड़ी के आरोप भी तेजस्वी यादव ने उठाए. उन्होंने कहा कि 1500 कंपनियां अर्धसैनिक बलों की तैनात की गई हैं, लेकिन इसके बावजूद जनता अपने वोट की चोरी नहीं होने देगी. आरोप लगाया कि जहाँ पिछली बार महागठबंधन को अधिक वोट मिले थे, उन क्षेत्रों में मतदान धीमा कराने की कोशिशें हो रही हैं. उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे निष्पक्षता से काम करें और जनता अपनी ताकत से किसी भी धांधली को रोक देगी.
रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि झूठे वादे हम नहीं करते. “हर परिवार को नौकरी” हमारा वादा है, और इसे पूरा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि लोग पूछते हैं कि पैसा कहाँ से आएगा, लेकिन 2020 में भी यही सवाल उठा था और हमारी 17 महीने की सरकार ने वादों पर काम करके दिखाया. हमारा सपना है कि बिहार का कोई युवा मजदूरी के लिए अपने परिवार से दूर न जाए. इसी धरती पर उसे सम्मानजनक रोजगार मिले और बिहार प्रतिभा का केंद्र बने.
महागठबंधन के अन्य नेताओं ने भी इस दौरान घोषणा पत्र के वादों पर अपनी बात रखी. वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि यह संकल्प पत्र नया बिहार गढ़ने की नींव बनेगा और एनडीए के पास घोषणा पत्र प्रस्तुत करने का भी नैतिक साहस नहीं है. भाकपा माले के वरिष्ठ नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कृषि मंडी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल की जाएगी. वृद्धजन पेंशन बढ़ाकर 3000 रुपये की जाएगी. कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह सिर्फ घोषणा नहीं बल्कि प्रतिज्ञा है, जो सरकार बनते ही लागू होने लगेगी. अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने भी एनडीए को विफल बताते हुए कहा कि जनता इस बार बदलाव के पक्ष में अपना फैसला देने जा रही है.
कुल मिलाकर महागठबंधन ने अपने नेतृत्व, वादों और विजन को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रख दिया है. दावा है कि यह संकल्प पत्र बिहार को नई दिशा और नई पहचान देगा. अब फैसला जनता के हाथ में है कि क्या वह इस नए सपने को स्वीकार करती है या फिर मौजूदा सरकार को एक और मौका देती है.
