नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को हुई एअर इंडिया विमान दुर्घटना को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जता दी है। यह याचिका एक गैर सरकारी संगठन सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विमान हादसे की आधिकारिक जांच ने नागरिकों के जीवन, समानता और सत्य जानकारी तक पहुंच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।
बुधवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पक्ष रखा। भूषण ने कोर्ट को बताया कि अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (AAIB) ने इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया है।
प्रशांत भूषण ने दलील दी कि पायलट संगठनों का कहना है कि बोइंग 787 विमान में तकनीकी खामियां हैं और जब तक इसकी गहन जांच नहीं होती, तब तक इस विमान को उड़ान से रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आधिकारिक जांच पारदर्शी नहीं रही और कई अहम सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई आज समाप्त हो जाएगी और इस मामले में अगली तारीख जल्द तय की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में मृत पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल को दोषी नहीं ठहराया गया था। इस मामले में कैप्टन सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को नोटिस भी जारी किया था।
बताया गया कि इस विमान दुर्घटना को लेकर कुल तीन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इनमें एक याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की, दूसरी कानून के एक छात्र की और तीसरी मृत पायलट के पिता पुष्कराज सभरवाल की है। तीनों याचिकाओं में अदालत की निगरानी में, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि एअर इंडिया की बोइंग 787-8 फ्लाइट AI-171 12 जून को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे में 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों समेत कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। विमान को कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर उड़ा रहे थे। फिलहाल पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।
