नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए है और न्याय प्रणाली में सुधार उनकी प्राथमिकता है। सीजेआई ने बताया कि लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय न्यायिक नीति उनकी पहली प्राथमिकता है। उनका उद्देश्य मुकदमेबाजी की लागत को कम करना और मामलों के निपटान के लिए एक निर्धारित समयसीमा तय करना है।
सीजेआई ने कहा, ‘मेरी पहली प्राथमिकता एक तय समयसीमा और एक एकीकृत राष्ट्रीय न्यायिक नीति बनाना है ताकि लंबित मामलों पर जल्द फैसला हो सके। मैं ये नहीं कह रहा कि सभी बकाया मामले खत्म कर दिए जाएंगे। ऐसा कभी नहीं होगा। ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि मुकदमेबाजी एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। लोगों को न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा और विश्वास है।’
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि नए मामले दायर होंगे, लेकिन पुराने मामलों का निपटारा होना भी जरूरी है। इसके लिए मध्यस्थता का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे वह गेम चेंजर मानते हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सुप्रीम कोर्ट में आने वाले दिनों में सुधार दिखाई देंगे और मुकदमेबाजी को प्राथमिकता मिलेगी। सीजेआई ने स्पष्ट किया, ‘मैं एक सख्त और स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट आम आदमी के लिए है और सामान्य मुकदमेबाजी के लिए भी सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्त जगह है।’ जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी माना कि वह अकेले यह काम नहीं कर सकते और इसमें अन्य जजों का सहयोग आवश्यक है। न्यायपालिका में डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराध जैसे नए मामलों से चुनौतियां बढ़ी हैं और उन्हें देखते हुए सुधार की आवश्यकता है।
सीजेआई ने कहा कि देश की न्यायपालिका में विविधता बढ़ रही है और जैसे समाज और देश आगे बढ़ रहे हैं, वैसे ही न्यायपालिका में भी बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने देश के लोकतंत्र और न्यायपालिका के भविष्य को उज्जवल बताया। न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बात करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘संविधान में शक्तियों का बंटवारा किया गया है। संविधान में न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका की अपनी-अपनी भूमिकाएं हैं और कोई भी शक्ति दूसरी शक्ति के अधिकारक्षेत्र में दखल नहीं देती। साथ ही संविधान की खूबसूरती ये भी है कि ये तीनों शक्तियां एक दूसरे के साथ मिलकर काम करती हैं और तीन की एक दूसरे पर निर्भरता भी है।’
सीजेआई ने अपने संबोधन में यह संदेश भी दिया कि लंबित मामलों को कम करना, डिजिटल और साइबर चुनौतियों से निपटना और आम जनता के लिए न्याय प्रणाली को सुलभ बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट में आम आदमी के लिए पर्याप्त जगह है और न्यायपालिका लगातार सुधार और विकास की ओर बढ़ रही है।
