बरेली : दरगाह आला हजरत पर आयोजित दो रोज़ा उर्स -ए- ताजुश्शरिया के सफल समापन के बाद अब जायरीन की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। देश -विदेश से लाखों अकीदतमंद इस रूहानी आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे, जो कुल शरीफ के बाद नम आंखों से दरगाह को सलामी देकर अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं। उर्स प्रभारी सलमान हसन खान (सलमान मियां) ने बताया कि जायरीन दरगाह पर हाजिरी देने के बाद सज्जादानशीन काज़ी -ए- हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा कादरी (असजद मियां) से इजाजत लेकर इस उम्मीद के साथ लौट रहे हैं कि अगले साल फिर हाजिरी देंगे। वहीं, राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान (फरमान मियां) के अनुसार अभी भी कई जायरीन दरगाह और जामियातुर्रज़ा इस्लामिक सेंटर में ठहरे हुए हैं, जो अपनी सहूलियत के अनुसार रवाना होंगे।
प्रशासन और वालंटियर्स का शुक्रिया
इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने सिलसिला -ए- आलिया कादरिया रज़विया से मुरीद होकर अपने पीर से रूहानी रिश्ता जोड़ा। उर्स के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के लिए जमात रज़ा -ए- मुस्तफा ने शासन-प्रशासन, एडीजी, कमिश्नर, डीएम, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त सहित सभी अधिकारियों और विभागों का आभार व्यक्त किया। उर्स के दौरान शहर और आसपास की शाखाओं फतेहगंज, बहेड़ी, आंवला, शाही, कैंट, बानखाना, पूरनपुर, बीसलपुर समेत कई क्षेत्रों के वालिंटियर्स ने लंगर, सबील, ट्रैफिक और जायरीनों की खिदमत में अहम भूमिका निभाई।
बरेली बना मोहब्बत का मरकज़
बरेली शरीफ एक बार फिर मोहब्बत, अकीदत और भाईचारे का केंद्र बना, जहां से इंसानियत और अमन -ओ-सुकून का पैगाम पूरी दुनिया तक पहुंचा।
