नई दिल्ली/रांची/ लखनऊ : 81 वर्षीय झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संरक्षक, तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री और आठ बार सांसद रहे शिबू सोरेन उर्फ ‘दिशोम गुरु’ का सोमवार को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। वे बीते डेढ़ महीने से किडनी संबंधी बीमारी से ग्रसित थे। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। एक भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा-“आज मैं शून्य हो गया हूं।”राजकीय सम्मान के साथ विदाई, झारखंड में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। राज्य में सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं,और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।
नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (ट्विटर) पर लिखा “शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे। जिन्होंने जनजातीय समुदायों, गरीबों और वंचितों के उत्थान के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उनके निधन से दुःख हुआ। मेरी संवेदनाएं हेमंत सोरेन और पूरे परिवार के साथ हैं।”
राष्ट्रपति, गृहमंत्री,रक्षामंत्री और एसपी चीफ ने जताया दुख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, नवीन पटनायक और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
शिबू सोरेन आदिवासी चेतना के प्रतीक, संघर्ष से सत्ता तक की कहानी
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944, नेमरा गांव, रामगढ़ (झारखंड) में हुआ था। उनके पिता सोबरन मांझी एक शिक्षक थे,, जिनकी हत्या के बाद शिबू का जीवन बदल गया। उनकी राजनीति की शुरुआत पिता की हत्या के बाद हुई । आदिवासी शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। 3 बार झारखंड के मुख्यमंत्री,8 बार दुमका से सांसद,कोयला मंत्री रहे,और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक थे।
दिशोम गुरु से जननेता तक का सफर
पिता की हत्या के बाद शिबू सोरेन ने सामाजिक कार्यों में कदम रखा। पारसनाथ की तलहटी में बसे गांवों में आदिवासी समुदाय को संगठित किया और झारखंड आंदोलन का नेतृत्व किया। वे 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक बने। 40 वर्षों तक झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष किया।
