रामपुर : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गया एक युवा आज ताबूत में लिपटकर अपने घर लौट रहा है। रामपुर के मसवासी गांव के रहने वाले 22 वर्षीय शावेद की रूस में गोली लगने से मौत हो गई। शनिवार तड़के उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से परिजन उसे लेने के लिए रवाना हुए।
परिजनों के मुताबिक, शावेद रूस में रहकर काम कर रहा था और बाद में वह रूसी सेना में शामिल हो गया था। ड्यूटी के दौरान उसे गोली लगी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। इस खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घर में मातम का माहौल है और हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर यह सब कैसे हुआ।
शावेद एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता था। वह इंटर पास था और अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसके पिता दुल्हे हसन दूध बेचकर घर का खर्च चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, ऐसे में शावेद का विदेश जाना पूरे परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया था। उसका छोटा भाई नावेद मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जबकि बहन अभी इंटरमीडिएट में पढ़ाई कर रही है।
जानकारी के अनुसार, शावेद 15 जून 2025 को बेहतर कमाई के लिए रूस गया था। उसके साथ हल्द्वानी का तसलीम भी गया था, लेकिन कुछ समय बाद तसलीम वापस लौट आया। शुरू में शावेद का परिवार से संपर्क बना रहा, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत कम होती गई। परिजनों ने बताया कि 5 सितंबर 2025 को उनकी आखिरी बार शावेद से बात हुई थी। उस समय वह काफी घबराया हुआ और परेशान लग रहा था। उसने ज्यादा कुछ नहीं बताया, लेकिन उसकी आवाज में डर साफ झलक रहा था। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया और परिवार उसकी खबर के लिए परेशान रहने लगा।
कई महीनों तक जब शावेद से कोई संपर्क नहीं हुआ, तो परिजनों की चिंता बढ़ती गई। आखिरकार 6 जनवरी 2026 को परिवार ने रामपुर के सांसद के माध्यम से विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को अचानक एक कॉल ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया। कॉल करने वाले ने खुद को रूसी सेना का अधिकारी बताया और जानकारी दी कि शावेद की मौत 12 सितंबर 2025 को ड्यूटी के दौरान गोली लगने से हो गई थी। साथ ही यह भी बताया गया कि उसका शव दिल्ली भेजा जा रहा है।
इस खुलासे के बाद परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर शावेद की मौत सितंबर 2025 में हो गई थी, तो उसके परिवार को यह जानकारी करीब सात महीने बाद क्यों दी गई। फिलहाल परिजन दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं और शव को लेने की प्रक्रिया में जुटे हैं। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए भी एक चेतावनी बनकर सामने आई है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में बिना पूरी जानकारी के विदेश चले जाते हैं।
