गोहत्या के मुद्दे पर सरकार को घेरा, “जनसंख्या बढ़ानी है, तो खुद उदाहरण बनें” बयान से गरमाई राजनीति
बरेली : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बरेली दौरे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।उन्होंने प्रेसवार्ता के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार पर गोहत्या के मामलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए, वहीं मोहन भागवत पर भी तीखा तंज कसते हुए बयान दिया, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गोहत्या के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि लोगों को उम्मीद थी कि सरकार बनने के बाद इन पर रोक लगेगी।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बूचड़खाने अब भी संचालित हो रहे हैं, और यह स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि “सनातन प्रेमियों की अपेक्षाओं के विपरीत हालात बने हुए हैं” और यह प्रदेश के लिए शर्म की बात है।
एक मई से यूपी में भ्रमण
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि वे 1 मई से पूरे प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान वे लोगों को जागरूक करेंगे कि ऐसी सरकार चुनें, जो गोहत्या पर पूरी तरह रोक लगा सके।
मोहन भागवत पर बयान से मचा बवाल
बरेली में ही उन्होंने हिंदू जनसंख्या के मुद्दे पर मोहन भागवत को लेकर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर हिंदुओं की संख्या बढ़ाने की बात की जा रही है, तो संघ प्रमुख को खुद विवाह कर उदाहरण पेश करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टिकोण से जोड़ रहे हैं, तो कुछ इसे सीधा राजनीतिक कटाक्ष मान रहे हैं।
संत समाज का उद्देश्य लोक कल्याण
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि संत समाज का उद्देश्य लोक कल्याण है, न कि राजनीति में सक्रिय भागीदारी। उन्होंने जोर देकर कहा कि “धर्म और राजनीति की शपथ अलग-अलग होती है, और दोनों को एक साथ निभाना संभव नहीं है।”
बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
शंकराचार्य के इन बयानों के बाद बरेली से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक सियासी माहौल गर्म हो गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, उनके इस दौरे और बयानों ने चुनावी माहौल से पहले ही उत्तर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है।
