172 करोड़ की लागत से बनी अत्याधुनिक जेल में शुरू हुआ बंदियों का स्थानांतरण, महिला कैदियों के लिए अलग व्यवस्था
बरेली : लंबे इंतजार के बाद बरेली की नई जिला जेल में बंदियों की शिफ्टिंग का काम शुरू हो गया है। शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केंद्रीय कारागार-2 से सात वर्ष से कम सजा पाने वाले 150 बंदियों को नई जेल में स्थानांतरित किया गया। जेल प्रशासन की निगरानी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। कोतवाली क्षेत्र के रजिस्ट्री कार्यालय के पास करीब 172 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई यह नई जिला जेल आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से सुसज्जित है। लगभग सात वर्षों के इंतजार के बाद जेल को पूरी तरह संचालित करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। जेल की कुल क्षमता 2579 बंदियों की है। जिससे भविष्य में बढ़ती संख्या को भी आसानी से समायोजित किया जा सकेगा।
सीसीटीवी कैमरों से लैस
नई जिला जेल में बंदियों की शिफ्टिंग शुरू हो गई है। पहले चरण में 150 कैदी पहुंचे हैं। इसमें महिला बंदियों के लिए अलग से कैमरों का व्यापक नेटवर्क स्थापित किया गया है। इसके अलावा हाई सिक्योरिटी सेल, आधुनिक कंट्रोल रूम और निगरानी तंत्र विकसित किया गया है, जिससे जेल के भीतर होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सके। महिला बंदियों के लिए भी अलग बैरक और विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। जेल प्रशासन ने महिला बंदियों की शिफ्टिंग की तैयारी भी पूरी कर ली है।
महिला और पुरुष बंदियों के लिए अलग -अलग व्यवस्था
जेल अधिकारियों का कहना है कि महिला और पुरुष बंदियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई गई हैं ताकि सुरक्षा और अनुशासन बेहतर तरीके से बनाए रखा जा सके। जेल की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए शासन ने हाल ही में 15 करोड़ रुपये जारी किए थे। इस धनराशि से फर्नीचर, सुरक्षा उपकरण, निगरानी प्रणाली और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में अधीक्षक, डिप्टी जेलर और फार्मासिस्ट की तैनाती हो चुकी है, जबकि चिकित्सक की नियुक्ति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू भी रहे थे जेल में
नई जिला जेल ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बरेली की पुरानी जेल स्वतंत्रता संग्राम की कई ऐतिहासिक घटनाओं और महान हस्तियों की साक्षी रही है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू,क्रांतिकारी एम.एन. रॉय, सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान और साहित्यकार यशपाल समेत कई प्रमुख हस्तियां यहां बंदी रह चुकी हैं। अब आधुनिक सुविधाओं और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के साथ यह नया परिसर बरेली की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था का अहम केंद्र बनने जा रहा है।
