नई दिल्ली/पटना : राज्यसभा की सीटों के लिए चल रहे चुनाव के बीच बिहार और ओडिशा में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के नेताओं के बयान और विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर चुनावी गणित को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं। खासकर बिहार में पांच सीटों के लिए हो रहे चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्यसभा चुनाव को लेकर कहा कि इस चुनाव में जीत के लिए जनता के आदेश का समीकरण सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी पांच उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे। उनके अनुसार एनडीए के उम्मीदवार सुशासन और विकास की राजनीति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल रोने और आरोप लगाने की राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी बिहार को मुश्किलों में डाला था, आज वही लोग जनता के सामने बेनकाब हो रहे हैं और जनता उन्हें सबक सिखा रही है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राज्यसभा चुनाव को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग या सुपर क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि बिहार की पांचों सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे। गिरिराज सिंह ने कहा कि अब राज्यसभा चुनाव में पैसे के बल पर राजनीति नहीं चलेगी, बल्कि विधायकों का समर्थन और राजनीतिक समीकरण ही जीत तय करेंगे।
इसी बीच पहली बार राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान करने पहुंचीं भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने कहा कि वह पहली बार राज्यसभा चुनाव में वोट देने जा रही हैं, इसलिए यह उनके लिए खास अनुभव है। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से पार्टी की बैठकों का दौर चल रहा था, ताकि मतदान प्रक्रिया में कोई गलती न हो। मैथिली ठाकुर ने विश्वास जताया कि एनडीए इस चुनाव में जीत हासिल करेगा और पार्टी को जनता का पूरा समर्थन प्राप्त है।
दूसरी ओर विपक्ष भी इस चुनाव को लेकर सक्रिय नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रणविजय साहू ने कहा कि यह केवल राज्यसभा का चुनाव नहीं है, बल्कि बिहार और देश की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के पक्ष में माहौल है और सभी सदस्य एकजुट होकर मतदान करेंगे। रणविजय साहू ने कहा कि इस चुनाव में आंकड़ा 50 तक जाएगा और गठबंधन के सभी सहयोगी दल मजबूती से साथ खड़े हैं।
इधर ओडिशा में भी राज्यसभा की चार सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है, जबकि बीजू जनता दल की एक सीट लगभग तय मानी जा रही है। चौथी सीट को लेकर मुकाबला काफी रोचक होता जा रहा है।
ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। वहीं 15 जनवरी को दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजू जनता दल के पास 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक विधायक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का है। ऐसे में चौथी सीट के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना किसी भी दल के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के गणित के अनुसार किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए 30 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। भारतीय जनता पार्टी के पास 82 सदस्यों का समर्थन होने के कारण वह अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी 22 अतिरिक्त वोट बचा सकती है। वहीं बीजू जनता दल के एक उम्मीदवार के जीतने के बाद उसके पास करीब 18 अतिरिक्त वोट बचेंगे। इसी कारण चौथी सीट को लेकर क्रॉस वोटिंग की संभावना भी जताई जा रही है।
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं, जिन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। वहीं बीजू जनता दल ने संतृप्त मिश्रा और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होटा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने बीजू जनता दल के उम्मीदवारों को समर्थन देने का फैसला किया है।
कुल मिलाकर बिहार और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और चुनावी गणित ने मुकाबले को काफी रोचक बना दिया है। अब सभी की नजरें मतदान के परिणामों पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में दोनों राज्यों की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
