बरेली : आला हज़रत के 107वें उर्स-ए-रज़वी और उर्स -ए- अमीन -ए-शरीअत की रूहानी शुरुआत मरकज़ी मस्जिद बीबी जी में नातिया मुशायरे से हुई। अफ़रोज़ मियां की सरपरस्ती और अदनान मियां की सदारत में सजी इस महफ़िल में मुल्क भर के नामवर शायरों ने अक़ीदतों का नज़राना पेश किया।
नातिया मुशायरा में इश्क़-ए-रसूल की महफ़िल
शायर-ए-इस्लाम नक़ी अंजुम, ग़ुलाम ग़ौस ग़ज़ाली, इमरान बरकाती, हमदम फ़ैज़ी, मीर हसन मुस्तफ़ाई, फरहान बरकाती, नईम अख़्तर, अकील सिद्दीकी, रियाज़ अख़्तर, आक़िब इलाहाबादी समेत दर्जनों शायरों ने नात पेश की। मुशायरे का संचालन हाफ़िज़ इमरान बरकाती ने किया। आखिर में हुज़ूर अमीन -ए-शरीअत, हुज़ूर ताजुश्शरीआ और हज़रत अब्दुल हसीब नूरी व दीगर बुज़ुर्गों की फ़ातिहा हुई। नबीरा-ए-आला हज़रत मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने ख़ुसूसी दुआ फ़रमाई और मौलाना अब्दुल्लाह रज़ा क़ादरी ने सलाम पेश किया।
लंगर, मेडिकल कैंप और मुफ़्त टेम्पो सेवा
आरएसी (ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी) की टीमों ने लंगर-ए-आम का सिलसिला शुरू किया। बिहारीपुर ढाल पर मेडिकल कैम्प लगाया गया, जहां ज़ायरीन को मुफ्त दवाएं दी गईं। माल गोदाम रोड से उर्सगाहों तक मुफ़्त टेम्पो सेवा भी आरंभ हुई। आरएसी वॉलंटियर्स शहर की सीमाओं से लेकर गलियों तक जायरीन की मदद में जुटे रहे।
चादरों के जुलूस और इस्तक़बाल
सुबह से ही ज़िले और आसपास से चादरों के जुलूस दरगाह आला हज़रत पहुँचे। रिठौरा से बड़ा जुलूस आरएसी नगर अध्यक्ष फ़रमूद रज़ा की अगुवाई में पहुंचा। शाम को परचमी जुलूस जब बिहारीपुर ढाल पहुँचा, तो फूलों की बारिश के साथ शानदार इस्तक़बाल किया गया।
