बरेली : दरगाह-ए-आला हज़रत बरेली में चल रहे उर्स-ए-रज़वी के दूसरे दिन इस्लामिया मैदान में नामूस -ए-रिसालत कॉन्फ्रेंस, आपसी सौहार्द कॉन्फ्रेंस और मसलक-ए-आला हज़रत कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। हज़ारों जायरीन और देश-विदेश से आए उलेमा की मौजूदगी में मुफ्ती -ए-आज़म हिंद, मुफस्सिर-ए-आज़म और रेहान-ए-मिल्लत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
हिन्दुस्तानी संविधान दुनिया का सबसे खूबसूरत
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मुफ्ती सलीम बरेलवी ने कहा”दुनिया के मुल्कों का सबसे खूबसूरत संविधान हमारे हिंदुस्तान का है। अपने मज़हब और मसलक का वफादार वही है, जो अपने मुल्क का वफादार और सच्चा देशभक्त है। कारी सखावत मुरादाबादी ने कहा”इमामों को जुमे के खुतबे में आपसी सौहार्द और भाईचारा बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।”मुफ्ती अब्दुल रऊफ (कश्मीर) ने “नामूस -ए-रिसालत की हिफाज़त करें और मसलक-ए-आला हज़रत पर क़ायम रहें।” मौलाना मुख़्तार बहेडवी ने “मुफ्ती-ए-आज़म हिंद ने विभाजन के समय नफ़रत की दीवार को गिराने का काम किया।”कारी यूसुफ़ रज़ा सम्भली : समाज में फैली बुराइयों नशाखोरी, सूद, ज़िना, फुजूलखर्ची से दूर रहने का पैग़ाम दिया। मौलाना कमर रज़ा ने आला हज़रत के वैज्ञानिक योगदान पर रौशनी डाली।
आला हजरत से बरेली की पहचान

मौलाना जाहिद रजा,और मुफ्ती बशीर उल क़ादरी ने कहा”बरेली की पहचान आला हज़रत हैं, यहाँ आला हज़रत कॉरिडोर बने। मुफ्ती अख़्तर (शायराना अंदाज़) ने कहा “जिसमें खाते हैं कभी छेद नहीं करते, दर-ब-दर झुकता नहीं है अपना माथा कहीं।”
किताब इमदादुल कारी किताब का विमोचन
कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी ने कुल शरीफ की फातिहा कराई। मुफ्ती आक़िल रज़वी ने मुल्क की तरक्की और मिल्लत की खुशहाली के लिए खास दुआ की और अपनी किताब इमदादुल कारी (जिल्द 9) का विमोचन करवाया। नेपाल, मॉरीशस और अन्य मुल्कों से आए उलेमा ने भी आला हज़रत को खिराज पेश किया। रात देर तक चलने वाले इस प्रोग्राम में लाखों जायरीन मौजूद रहे।
कुल शरीफ कल दोपहर 2.38 बजे
20 अगस्त को बाद नमाज़-ए-फज्र कुरानख्वानी से उर्स का आगाज होगा। सुबह 8 बजे इस्लामिया मैदान में महफ़िल,और तकरीर, दोपहर 2:38 बजे कुल शरीफ की रस्म और उर्स का समापन।
