बरेली : फ़ाज़िल-ए-बरेलवी इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ (आला हजरत) के बेटे और विश्वविख्यात इस्लामी विद्वान मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद मौलाना मुस्तफ़ा रज़ा ख़ाँ का एक अनोखा वाक़या आज भी इतिहास का हिस्सा है। सन 1972 में जब वे हज पर जाना चाहते थे, तो पासपोर्ट बनवाने में बड़ी रुकावट आई। वजह यह थी कि मुफ़्ती-ए-आज़म का फतवा था कि “इस्लाम में तस्वीरे खिंचवाना हराम है।” उन्होंने पासपोर्ट के लिए फोटो खिंचवाने से साफ़ इनकार कर दिया। मुरीदों के ज़रिए जब यह बात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक पहुँची, तो उन्होंने ख़ुद पहल की और सऊदी अरब के शासक शाह फ़ैसल से बात की। उलमा बताते हैं कि पीएम इंदिरा गांधी ने अपनी गारंटी पर मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद समेत सात लोगों को बिना पासपोर्ट के हज पर जाने की इजाज़त दिलवाई।
गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज
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https://youtu.be/E9Vi8jmHrrE?si=YOfzqNxTpoZRzaNp
उलमा का कहना है कि इस अनोखे वाक़ये का ज़िक्र गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी मौजूद है। दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी कहते हैं “हिंदुस्तान में पहली और आख़िरी बार ऐसा हुआ कि कोई बिना पासपोर्ट के हज कर आया।”
नसबंदी के खिलाफ़ फतवा सबसे चर्चित
मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद ने अपनी ज़िंदगी में सैकड़ों फतवे दिए। उनमें से “नसबंदी के खिलाफ़ फतवा” सबसे चर्चित रहा। उनका जन्म 18 जुलाई 1892 को मोहल्ला सौदागरान, बरेली में हुआ था और 92 साल की उम्र में 12 नवंबर, 1981 को उनका विसाल (दुनिया से रुखसती) हुआ।
