कानपुर/लखनऊ : भारत की बर्फीली सीमाओं पर तैनात जवान अब और अधिक सुरक्षित होंगे। भारतीय सेना और IIT कानपुर ने एक ऐसी स्मार्ट तकनीक विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जिससे हिमस्खलन में दबे सैनिकों का पता सीधे उनकी वर्दी से लगाया जा सकेगा। अब जब सैनिक बर्फ के नीचे दब जाएं, तो उनकी वर्दी में लगे एक उपकरण से प्रकाशमान द्रव (Luminous Fluid) छोड़ा जाएगा, जो उन्हें दूर से भी ट्रैक करने में मदद करेगा।
जानें कैसे शुरू हुई पहल
इस “Automated Avalanche Victim Detection System” (AAVDS) को डिवेलप करने के लिए एमओयू पर दस्तखत किए गए। बताया जाता है कि लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता सूर्या कमान के जीओसी और IIT कानपुर से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुब्रमण्य में बात तय हो चुकी है।इसकी निगरानी मुख्यालय मध्य कमान की एक विशेष आयुध कंपनी और लेफ्टिनेंट कर्नल पीयूष धारीवाल करेंगे।
तकनीक से क्या होगा फायदा?
इस तकनीक से बर्फीली सीमाओं पर गायब जवानों को जल्द खोजा जा सकेगा। सेना की रेस्क्यू क्षमता और तेजी से बढ़ेगी। यह प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी (Made in India) है। रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने मीडिया को बताया कि “यह पहल भारतीय सेना की दुर्गम क्षेत्रों में क्षमताएं बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है।” IIT कानपुर प्रो. डॉ. सुब्रमण्य ने कहा कि “हम सेना के साथ मिलकर देश की रक्षा में तकनीकी सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
