मुरैना : मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रविवार को एक दर्दनाक रेल हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर हुए इस हादसे में तीन महिलाओं और एक मासूम बच्चे समेत कुल छह लोगों की मौत की सूचना है, जबकि कई अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर रेलवे और जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस ग्वालियर से मुरैना की ओर जा रही थी। यात्रा के दौरान अचानक किसी यात्री ने ट्रेन की एक बोगी में आग लगने की बात कही। आग लगने की सूचना फैलते ही डिब्बे में बैठे यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही मिनटों में पूरे कोच में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग की सूचना के बाद कई यात्रियों ने घबराकर आपातकालीन चेन खींच दी, जिससे ट्रेन अचानक रुक गई। ट्रेन रुकते ही बड़ी संख्या में यात्री अपनी सुरक्षा के लिए नीचे उतरने लगे। कई लोग बिना स्थिति की पूरी जानकारी लिए रेलवे ट्रैक और उसके आसपास पहुंच गए। इसी दौरान दूसरी लाइन पर धौलपुर की ओर से आ रही पातालकोट एक्सप्रेस वहां पहुंच गई।
बताया जा रहा है कि ट्रेन से उतरकर ट्रैक पर खड़े या भाग रहे कुछ यात्री पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही कई लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद रेलवे ट्रैक पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायल यात्रियों की मदद के लिए आसपास मौजूद लोगों ने भी प्रयास किए। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। जीआरपी, आरपीएफ और मुरैना पुलिस की टीमों को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया। राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल कुछ यात्रियों को बेहतर उपचार के लिए रेफर भी किया गया।
मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन मृतकों की पहचान करने और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। हादसे की खबर मिलते ही कई परिवार अस्पताल और रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर अपने परिजनों की जानकारी लेने में जुट गए।
इस दर्दनाक हादसे का असर दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर भी पड़ा। घटना के बाद कुछ समय के लिए रेल यातायात बाधित हो गया। कई ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोकना पड़ा, जबकि कुछ ट्रेनों के संचालन में देरी हुई। रेलवे प्रशासन ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया। बाद में राहत और बचाव कार्य पूरा होने तथा ट्रैक साफ किए जाने के बाद रेल यातायात को धीरे-धीरे सामान्य किया गया। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ट्रेन में आग लगने की सूचना कहां से और कैसे फैली। प्रारंभिक जांच में अब तक ट्रेन में किसी प्रकार की आग लगने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का मानना है कि किसी यात्री द्वारा फैलाई गई अफवाह या गलतफहमी के कारण यात्रियों में घबराहट फैल गई, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हो गया।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आग लगने की सूचना किसने दी और किस परिस्थिति में यह अफवाह फैली। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आपातकालीन चेन खींचने और यात्रियों के ट्रैक पर उतरने की परिस्थितियां क्या थीं।
पुलिस और रेलवे की संयुक्त टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल मुरैना का यह रेल हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर गया है कि अफवाहें किस तरह कुछ ही पलों में बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं। एक सूचना, जिसकी पुष्टि तक नहीं हुई थी, ने कई लोगों की जान ले ली और कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और सुरक्षा नियमों का पालन करें।
